नई दिल्ली, 14 अगस्त (पीटीआई) – दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष (HoDs) अब आईटी से संबंधित सभी वस्तुओं की प्रत्यक्ष खरीद, मरम्मत, किराया, रखरखाव और उपकरणों की खरीद बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने एक बयान में कहा कि 2019 के बाद यह पहली बार है जब सरकारी अधिकारियों की वित्तीय शक्तियों में इतना बड़ा इजाफा किया गया है। यह कदम सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए उठाया गया है।
बयान के अनुसार, प्रशासनिक सचिवों को विशेष मामलों में पूर्ण वित्तीय अधिकार दिए गए हैं, जिनमें व्यक्तिगत सलाहकारों, कंसल्टेंसी, पेशेवरों, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स (PMUs) और अन्य विशेषज्ञों की नियुक्ति, मानव संसाधन की भर्ती, उपकरणों की खरीद और निष्प्रयोज्य वाहनों के स्थान पर नए वाहनों का अधिग्रहण शामिल है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह कदम सुशासन को बढ़ावा देगा और योजनाओं के क्रियान्वयन व समय पर पूरा होने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति, महंगाई के कारण बढ़ती लागत और नई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत के चलते परियोजनाओं के निष्पादन में बदलाव आया है, जिसके लिए वित्तीय शक्तियों में वृद्धि जरूरी थी।
गुप्ता ने कहा कि “विकसित दिल्ली” के निर्माण और योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचाने के लिए, इस वर्ष का दिल्ली बजट 1 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जबकि पिछली संशोधन अवधि में यह 54,800 करोड़ रुपये था।
उन्होंने कहा, “इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि आवंटित बजट का प्रभावी उपयोग हो, विभागीय कार्यों में अनावश्यक देरी न हो, परियोजनाओं के निष्पादन में तेजी आए और समय पर पूरा हो सके — इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की वित्तीय शक्तियां बढ़ाई जा रही हैं।”
सीएम ने कहा कि यह फैसला न केवल सुशासन को मजबूत करेगा बल्कि जनसेवाओं की समय पर और प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित करेगा तथा फाइलों के अनावश्यक विभागीय आवागमन से होने वाली देरी को खत्म करेगा।
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