रांची, 19 अगस्त (PTI) – झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राज्य की झामुमो (JMM) नेतृत्व वाली सरकार आदिवासी जमीन ‘हड़प’ रही है।
एक प्रेस वार्ता में सोरेन ने कहा कि रांची के नागरी इलाके में प्रस्तावित 1000 करोड़ रुपये के RIMS-2 अस्पताल परियोजना के लिए जमीन जबरदस्ती अधिग्रहित की गई है। उन्होंने बताया कि किसानों को उनकी जमीन जोतने से रोका गया और उसे बाड़ों से घेर दिया गया।
सोरेन ने इस बल प्रयोगित अधिग्रहण के खिलाफ अगस्त 24 को होने वाले ‘हल जोतो, रोपा रोपो’ प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि जमीन मालिकों को न तो अधिग्रहण की कोई सूचना दी गई और न ही मुआवजा। उन्होंने सरकार पर जमीन के दस्तावेज दिखाने से भी बचने का आरोप लगाया।
पूर्व सीएम ने स्पष्ट किया कि वे अस्पताल परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, पर रांची में कई बंजर या अप्रयुक्त भूमि है जहां अस्पताल बनाया जा सकता है।
सोरेन का दावा है कि इस मामले में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013, छोटानागपुर टेनेंसी (CNT) एक्ट और ग्राम सभा नियमों का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी लगातार राज्य में ‘हमले’ का सामना कर रहे हैं, उनके भूमि छीनी जा रही है, और जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं उन्हें मारा जा रहा है। उन्होंने सूरज हंसदा का उदाहरण दिया, जो कई विधानसभा चुनाव लड़े और बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते थे, उन्हें गिरफ्तार कर मारा गया क्योंकि वे आदिवासी थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा तिलका मांझी से लेकर सिदो-कान्हू, भगवान बिरसा मुंडा, और आगे डिसूम गुरू शिबू सोरेन तक आदिवासी नेताओं ने जल, जंगल, जमीन के लिए लगातार संघर्ष किया है।
उन्होंने सवाल किया, “पर हमारी समाज ने क्या पाया? कहा जाता है कि हम इस भूमि के मालिक हैं, पर सच्चाई यह है कि आज हम राशन कार्ड से मिलने वाले 5 किलो चावल पर निर्भर हैं और उसके लिए इंतजार करते हैं। यह स्थिति बदलनी चाहिए।”

