दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध धन उगाही के लिए याचिकाएँ दायर करने वाले पक्षकार को लगाया 10 लाख रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली, 19 अगस्त (पीटीआई) – दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में अवैध निर्माण के आरोप में याचिकाएँ दाखिल कर पैसा उगाहने का प्रयास करने वाले एक व्यक्ति पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करना ने इस मामले में कहा कि न्यायालय अवैध निर्माण के मामलों से कड़ी लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर किसी को मनी एक्सटॉर्शन का मौका न मिले।

कोर्ट ने आज़ाद मार्कেট आरडब्ल्यूए के महावीर सचिव अनिल लोढ़ी को फटकार लगाई, जो विपक्षी पक्षों से अवैध तरीके से धन उगाही के आरोप में शामिल हैं। कोर्ट ने वकील बाबूलाल गुप्ता का भी नाम लिया, जो एक कथित NGO ‘ग्रीन गोल्ड अर्थ ऑफ वर्ल्ड’ से जुड़े हैं, और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को उनकी कार्यप्रणाली की जांच कर उचित कार्रवाई करने के लिए कहा।

कोर्ट ने कहा कि निजी उत्तरदाताओं के वकील की ओर से प्रस्तुत बयान में दावा किया गया है कि अनिल लोढ़ी अपने क्लाइंट्स से धन उगाही के लिए लगातार संपर्क कर रहे थे। कोर्ट ने इस तरह के कृत्यों को गंभीर और चौंकाने वाला बताया, जिसमें पक्षकार ने न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर लोगों से पैसा ऐंठने के लिए मुकदमे दायर किए।

अगले समय में अनिल लोढ़ी या उनके संबद्ध NGO द्वारा दायर किये जाने वाले हर मामले के साथ इस आदेश को जोड़ा जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि न्यायालय में चलने वाली प्रक्रिया न्याय और न्याय की सहायता के लिए होती है, न कि किसी के अवैध उद्देश्य के लिए सहारा बनने के लिए।

तथ्यों के अनुसार, लोढ़ी के कई मामले एक ही वकील के माध्यम से दायर किए गए, और NGO के पते के तौर पर जो पता दिया गया है, वह उसी वकील के कक्ष का पता था।

यह मामला रोशनारा रोड और रानी झांसी रोड, झंडेवालन में अवैध निर्माण, बिजली और पेयजल के दुरुपयोग के खिलाफ संचालित था, जिसमें पहले से ही MCD ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी थी।

MCD को निर्देश दिया गया है कि ऐसे किसी भी अवैध काम के मामले में समयबद्ध कार्रवाई करें।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कथित अवैध निर्माण याचिकाकर्ता के पड़ोस में नहीं था और उन्होंने इससे पहले भी इसी तरह के अनुरोध किए थे, जिनमें NGO के माध्यम से भी थे।

कोर्ट ने समाजसेवा के नकाब में न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग व गंदे इरादों से मामला दायर करने के लिए दोषी बताते हुए छह सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया।

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