
नई दिल्ली, 19 अगस्त (पीटीआई): भारत और चीन ने मंगलवार को अपने “स्थिर, सहयोगी और दूरदर्शी” रिश्ते के लिए कई कदमों की घोषणा की, जिसमें सीमा पर शांति बनाए रखना, सीमा व्यापार को फिर से खोलना, निवेश प्रवाह को बढ़ावा देना और जल्द से जल्द सीधी उड़ान कनेक्टिविटी को फिर से शुरू करना शामिल है।
इन घोषणाओं का उद्देश्य एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की “पूर्ण” विकास क्षमता को साकार करना है। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों को लेकर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं।
भारत और चीन ने इन कदमों की सूची एक साझा दस्तावेज़ में जारी की, जो चीनी विदेश मंत्री वांग यी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच हुई वार्ताओं के बाद तैयार किया गया। वांग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई सहमतियों को लागू करना चाहिए और भारत-चीन संबंधों के सतत, स्वस्थ और स्थिर विकास को बढ़ावा देना चाहिए।
वार्ता में सीमा प्रबंधन, सीमा विवाद समाधान, व्यापार, निवेश, पर्यटन, वीज़ा सुविधा, कैलाश-मानसरोवर यात्रा को 2026 से बड़े पैमाने पर फिर से शुरू करने, साथ ही नदी सहयोग और आतंकवाद पर चर्चा शामिल रही।
प्रधानमंत्री मोदी ने वांग से मुलाकात के बाद कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और रचनात्मक संबंध न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति में भी योगदान देंगे। उन्होंने आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन (तियानजिन, 31 अगस्त – 1 सितंबर) में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की प्रतीक्षा जताई।
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