रांची, 20 अगस्त (PTI) – झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने बुधवार को सभी वाणिज्यिक रेत घाटों की नीलामी प्रक्रिया सितंबर के प्रथम पखवाड़े के भीतर पूरी करने के निर्देश अधिकारियों को दिये हैं।
उन्होंने सभी उपायुक्तों (DCs) से आग्रह किया है कि वे रेत घाटों के लिए नई नीति को समझें ताकि नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी हो और तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके।
तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों को संबोधित करते हुए कहा, “नई नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित दाम पर रेत उपलब्ध कराना है, साथ ही गैरकानूनी रेत व्यापार को पूरी तरह से रोकना और अन्य राज्यों से रेत के प्रवेश को निरुत्साहित करना है।”
इस बैठक में मौजूद खनन सचिव अरव राजकमल ने बताया कि नीलामी में उपायुक्तों की अहम भूमिका होगी।
राजकमल ने कहा, “राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का रेत घाटों से खनन पर प्रतिबंध 15 अक्टूबर के बाद समाप्त हो जाएगा। इससे पहले नीलामी प्रक्रिया पूरी करना समय पर खनन सुनिश्चित करेगा और राज्य में रेत की कमी को रोकेगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार रेत की कीमत निर्धारित नहीं करेगी।
झारखंड में रेत घाटों को दो श्रेणियों में बांटा गया है।
पहली श्रेणी में वे रेत घाट शामिल हैं जिनका क्षेत्रफल 5 हेक्टेयर से कम है, जिन्हें ग्राम सभाओं के माध्यम से संचालित किया जाएगा। ऐसी 374 रेत घाट हैं।
दूसरी श्रेणी में वे रेत घाट आते हैं जिनका क्षेत्रफल 5 हेक्टेयर से अधिक है, जिन्हें नीलामी के माध्यम से आवंटित किया जाएगा।
नीलामी के लिए छोटे और बड़े रेत घाटों को मिलाकर कुल 60 समूह बनाए गए हैं।
किसी भी व्यक्ति को 1,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले रेत घाट आवंटित नहीं किए जाएंगे, और न ही उन्हें दो से अधिक समूहों के लिए ठेका दिया जाएगा।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज
एसईओ टैग्स (Hindi):
#swadesi #News #झारखंड #रेत_नीलामी #राज्य_नीति #ग्रामीण_विकास #BreakingNews

