पटना, 25 अगस्त (PTI) – वरिष्ठ बीजेपी नेता रवीशंकर प्रसाद ने सोमवार कहा कि पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी का सालवा जुदुम पर दिया गया फैसला उनके माओवादी विचारधारा के प्रति झुकाव को दर्शाता है। रेड्डी हैं इंडिया ब्लॉक के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार।
रेड्डी और जस्टिस एस.एस. निज्जर की बेंच ने जुलाई 2011 में सालवा जुदुम को समाप्त करने का आदेश दिया था। सालवा जुदुम के तहत आदिवासी युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में माओवादी से लड़ाई में लगाना अवैध और असंवैधानिक पाया गया था।
पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री प्रसाद ने कहा, “भारत में उपराष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद है, इसलिए इस पद के लिए चुने गए व्यक्ति की सोच और विचारधारा जानना बेहद आवश्यक है। न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी के सालवा जुदुम मामले का फैसला स्पष्ट रूप से उनके माओवादी विचारधारा की सहानुभूति को दिखाता है।”
उन्होंने कहा कि अमित शाह का यह बयान उचित है और रेड्डी का फैसला माओवादी लड़ाई को गंभीर झटका पहुंचाने वाला था। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय की यूपीए सरकार ने सालवा जुदुम मामले में छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार का समर्थन किया था, लेकिन अब वही पार्टी और उसके सहयोगी उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना रहे हैं।
सालवा जुदुम फैसले में उपयोग किए गए शब्द न्यायाधीश के विचारधारा और दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद को समाप्ति की कगार पर पहुंचाया गया है।
साथ ही 18 से अधिक सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने अमित शाह के इस बयान को “अफसोसजनक” और “नामकरण से परहेज” करने की सलाह देते हुए यह टिप्पणियाँ की हैं।
रवीशंकर प्रसाद ने कहा, “मैं जानता हूं कि कानून किसी भी फैसले की समीक्षा करने की अनुमति देता है, इसमें कोई गलत बात नहीं है।”
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज
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