नई दिल्ली, 28 अगस्त (PTI) – दिल्ली विश्वविद्यालय ने आगामी छात्र संघ चुनावों के दौरान संपत्ति क्षति को रोकने के लिए सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार विश्वविद्यालय ने प्रिंसिपलों को उनके परिसर के “एंटी-अपमूल्यन प्रमुख” नियुक्त करने को कहा है, जो सुनिश्चित करेंगे कि कॉलेज परिसर के भीतर या आसपास पोस्टर, बैनर, दीवार लेखन और होर्डिंग अनुमति प्राप्त स्थानों पर ही हों।
विश्वविद्यालय ने संपत्ति के अपमूल्यन को रोकने के लिए विश्वविद्यालय समिति (UCPDP) का गठन किया है, जिसमें विश्वविद्यालय के एस्टेट ऑफिसर प्रो. बिपिन कुमार तिवारी, वरिष्ठ संकाय सदस्य, दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और नगरपालिका प्रतिनिधि शामिल हैं।
प्रत्येक कॉलेज को भी स्थानीय पुलिस स्टेशन के एसएचओ और वरिष्ठ संकाय सदस्य को शामिल कर एक समिति बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जो चुनाव संबंधित गतिविधियों पर नजर रखेगी। ये समिति कार्यशालाओं का आयोजन करेगी, “लोकतंत्र की दीवारें” बनाएगी, और गैरकानूनी प्रचार सामग्री की जांच के लिए पुलिस व नागरिक निकायों के साथ समन्वय कर कार्य करेगी।
विश्वविद्यालय ने उम्मीदवारों से चुनावी नामांकन पत्र पर यह शपथपत्र देने को कहा है कि वे और उनके समर्थक अपमूल्यन में लिप्त नहीं होंगे, अन्यथा ये उल्लंघन उनके नामांकन को निरस्त करने का कारण बन सकता है।
यह निर्देश विश्वविद्यालय के साझा स्थल, जिम्मेदारी और सम्मान की भावना की रक्षा के लिए सतत निगरानी और तुरंत कार्रवाई पर जोर देते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रों के संघ (DUSU) के चुनाव 18 सितंबर 2025 को होंगे, और वोटों की गिनती अगले दिन होगी। पिछले वर्ष, DUSU चुनाव में सार्वजनिक संपत्ति के अपमूल्यन के कारण वोट गिनती को दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक दिया था, जो तभी आगे बढ़ाई गई जब अपमूल्यत संपत्तियों की सफाई की गई।
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