नई दिल्ली, 28 अगस्त (PTI) – राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) में शामिल 130 शहरों के निवासियों की जीवन प्रत्याशा 2017 के मुकाबले दो वर्ष तक बढ़ सकती है, यदि भारत 2026 तक अपने संशोधित लक्ष्य के तहत पार्टिकुलेट प्रदूषण में 40 प्रतिशत की कमी करता है, एक नए अध्ययन में कहा गया है।
2019 में शुरू किए गए NCAP का लक्ष्य था कि 2017 के प्रदूषण स्तरों को 2024 तक 20-30 प्रतिशत तक घटाया जाए। 2022 में इसे बढ़ाकर 2026 तक 40 प्रतिशत कर दिया गया। प्रदर्शन आकलन के लिए वर्तमान में केवल PM10 के स्तरों को ध्यान में रखा जा रहा है।
शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टिट्यूट (EPIC) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह लक्ष्य पूरा होता है, तो इन शहरों के निवासियों का जीवनकाल 2017 की तुलना में दो साल अधिक होगा।
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 130 शहरों में से 103 ने 2024-25 में 2017-18 के मुकाबले PM10 स्तर में सुधार दिखाया है, जिनमें से 64 ने 20 प्रतिशत से अधिक और 25 ने 40 प्रतिशत से अधिक कमी की है। 22 शहर राष्ट्रीय आवासीय वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) के अनुरूप PM10 स्तर बनाए रखने में सफल रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का पूरा 1.4 अरब लोगों का क्षेत्र ऐसा है जहां वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देश से अधिक प्रदूषित है। साफ-सुथरे इलाकों में भी वायु की गुणवत्ता वैश्विक मानक पर पहुंच जाए, तो जीवन प्रत्याशा में 9.4 महीने का अतिरिक्त लाभ होगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023 में PM2.5 का स्तर 2022 से अधिक था, जो WHO मानक से आठ गुना अधिक है। अगर इसे ग्लोबल स्टैंडर्ड तक लाया जाता है, तो भारतियों की औसत जीवन प्रत्याशा में 3.5 वर्ष बढ़ सकता है।
WHO 2021 की गाइडलाइन के अनुसार, PM2.5 का वार्षिक औसत 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM10 का 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। वर्तमान में भारत के मानक PM2.5 के लिए 40 और PM10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हैं।
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