नई दिल्ली, 28 अगस्त (PTI) – एक नए अध्ययन में पता चला है कि जो ऊंचाई पर हवाई जहाज सामान्यत: उड़ान भरते हैं, वहां वातावरण अधिक अशांत हो सकता है अगर दुनिया की सतत गर्मी जारी रहती है। इससे हवा कम स्थिर होगी और अशांति की संभावना बढ़ जाएगी।
यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ़ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने यह जांच की कि कैसे जलवायु परिवर्तन के कारण बिजली की तेज हवाओं वाले क्षेत्र यानी जेट स्ट्रीम में हवा के झटके और हवा की स्थिरता में कमी हो रही है। उनके मुताबिक 2015 से 2100 के बीच हवा में 16-27 प्रतिशत अधिक तेजी और स्थिरता में 10-20 प्रतिशत कमी आ सकती है।
इस वजह से क्लियर-एयर टर्बुलेंस (CAT) के संभावित घटनाएं बढ़ेंगी, जो अचानक होती हैं और पायलटों के लिए भी बिना चेतावनी के मुश्किल होती हैं क्योंकि इसे रडार से पहचान पाना संभव नहीं है। इस प्रकार की अशांति की घटनाएं हाल के वर्षों में गंभीर चोटों और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण मौतों का कारण बनी हैं।
शोध दल के सदस्य जुआना मेडेइरोस ने कहा, “हवा में बढ़ी हुई झटका और कम स्थिरता इस अशांति को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते हैं, जो यात्रियों के लिए खतरनाक होती हैं।”
एवियेशन विशेषज्ञ प्रोफेसर पॉल विलियम्स ने कहा कि पायलटों को अधिक समय तक सीट बेल्ट संकेत जलाए रखने पड़ सकते हैं और केबिन सर्विस भी अधिक बार रोकनी पड़ सकती है। साथ ही एयरलाइंस को भी नई तकनीक अपनानी होगी जो अशांति का पता पहले से लगा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
अध्ययन में कम से कम और उच्च उत्सर्जन वाली जलवायु स्थितियों दोनों का विश्लेषण किया गया, जिसमें उच्च उत्सर्जन वाले परिदृश्य में अशांति की बढ़ोतरी अधिक होने की संभावना जताई गई है। यह समस्या दोनों गोलार्धों को प्रभावित करेगी।
यह भी कहा गया कि इस अशांति के कारण विमानन उद्योग को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है, जैसे कि अतिरिक्त ईंधन की खपत, उड़ान में विलंब, मेंटेनेंस आदि।
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