मुंबई, 29 अगस्त (पीटीआई) मुंबई में गुरुवार रात तक करीब 30,000 गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया गया है, महानगर की नगर निगम (बीएमसी) ने बताया।
10-दिवसीय उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में भक्त डेढ़ दिन, पांचवें दिन और सातवें दिन मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि अब तक शहर में इस प्रक्रिया के दौरान कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।
उन्होंने बताया, “गुरुवार रात 9 बजे तक यानी उत्सव के दूसरे दिन कुल 29,965 ‘डेढ़-दिनों’ की गणपति मूर्तियों का समुद्र, अन्य जलाशयों और कृत्रिम तालाबों में विसर्जन किया गया। इनमें 29,614 ‘गृह’ गणपति मूर्तियां और 337 ‘सार्वजनिक’ पंडालों की मूर्तियां शामिल हैं।”
बीएमसी ने दावा किया कि बड़ी संख्या में मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में किया गया है। शाम 3 बजे तक 583 गणपति मूर्तियों में से 326 (यानी 55% से अधिक) कृत्रिम झीलों में विसर्जित की गईं।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बीएमसी आयुक्त कार्यालय ने संबंधित विभागों से कहा है कि कृत्रिम तालाबों में विसर्जित मूर्तियों की संख्या को सार्वजनिक न किया जाए।
पीटीआई से संपर्क करने पर नगर आयुक्त-प्रशासक भूषण गगरानी ने इस मुद्दे पर कोई जवाब देने से परहेज किया।
बीएमसी ने एक बयान में कहा, “माननीय उच्च न्यायालय और महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिए गए आदेशों के अनुसार समय-समय पर कार्रवाई की गई है। साथ ही प्रभावी तरीके से जनजागरूकता भी बनाई गई है।”
इस वर्ष बीएमसी ने 70 प्राकृतिक जलाशयों (जिनमें समुद्र तट भी शामिल है) और 288 कृत्रिम तालाबों को विसर्जन के लिए चिह्नित किया है।
महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक यह उत्सव गणेश चतुर्थी (27 अगस्त) से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी (6 सितंबर) तक चलेगा।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बीएमसी ने नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण अनुकूल गणपति मूर्तियों का विसर्जन ड्रम या बाल्टी में करें। वहीं, 6 फीट से कम ऊंचाई की प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में किया जाना अनिवार्य है।
सार्वजनिक मंडलों से कहा गया है कि वे चढ़ावे को अलग-अलग करें ताकि जैविक सामग्री को खाद में बदला जा सके।
बीएमसी ने ऐसे मंडलों के 1000 से अधिक स्वयंसेवकों को आपातकालीन स्थितियों, जैसे भीड़भाड़, से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया है।
बीएमसी ने कहा कि मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे की लाइन पर बने 12 पुल खतरनाक हैं या मरम्मताधीन हैं। इसलिए गणपति आगमन और विसर्जन जुलूस में भाग लेने वाले लोग इन पुलों से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतें।
इन पुलों में करी रोड रेलवे फ्लाईओवर, आर्थर रोड रेलवे फ्लाईओवर (चिंचपोकली), सैंडहर्स्ट रोड रेलवे फ्लाईओवर (ग्रांट रोड और चर्नी रोड के बीच), फ्रेंच ब्रिज (ग्रांट रोड और चर्नी रोड के बीच) और दादर का लोकमान्य तिलक ब्रिज शामिल हैं।
बीएमसी ने कहा, “भक्तों से अपील है कि वे पुलों से उतरने के बाद ही उत्सव का आनंद लें। भीड़ न करें और पुलों पर न रुकें। जुलूस तेजी से आगे बढ़ें और बीएमसी व मुंबई पुलिस द्वारा जारी सभी निर्देशों का पालन करें।”
पर्यावरण-अनुकूल गणपति उत्सव को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष बीएमसी ने 1022 मूर्ति निर्माताओं को पंडाल लगाने के लिए मुफ्त जमीन दी है। इसके अलावा 990 मीट्रिक टन मिट्टी (शाडू माटी) और 10,800 लीटर पर्यावरण-अनुकूल रंग (जिसमें 3000 लीटर प्राइमर शामिल है) वितरित किए गए हैं।
पिछले वर्ष बीएमसी ने 200 से अधिक मूर्ति निर्माताओं को ‘शाडू माटी’ दी थी, जबकि इस बार यह संख्या 500 से अधिक हो गई है।
पीटीआई केके बीएनएम
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