प्रतापगढ़ (उ.प्र.), 29 अगस्त (पीटीआई): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि नवंबर 2024 में सांभर में हुई हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने नगर में दंगे की साज़िश की पुष्टि की है।
मुख्यमंत्री को गुरुवार को तीन सदस्यीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। यह हिंसा 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद पर एएसआई की निगरानी में हुए सर्वे के दौरान भड़की थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में सांभर की बदलती जनसांख्यिकी, हिंदुओं को निशाना बनाने की साज़िश और कट्टरपंथी संगठनों व बाहरी उपद्रवियों की भूमिका का उल्लेख है।
विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन समारोह में बोलते हुए आदित्यनाथ ने हिंसा को पिछली सरकारों में हिंदुओं पर हुए “लक्षित हमलों” से जोड़ा।
उन्होंने कहा, “न्यायिक आयोग ने गुरुवार को सांभर की घटना पर अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि 2024 में दंगे की साज़िश रची गई थी। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के शासनकाल में हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया, उनकी जनसांख्यिकी कम की गई, उन्हें सताया गया और दंगों के ज़रिए इलाकों को हिंदू-मुक्त किया गया।”
योगी ने कहा, “लेकिन आज डबल इंजन की सरकार है, जो जनसांख्यिकी बदलने नहीं देगी। जो भी ऐसा करने की कोशिश करेगा उसे भागना पड़ेगा क्योंकि अब हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। हम अब संतुष्टिकरण की ओर बढ़ रहे हैं, न कि तुष्टिकरण की ओर।”
सांभर विवाद की जड़ 19 नवंबर 2024 से जुड़ी है, जब हिंदू पक्षकारों ने ज़िला अदालत में वाद दायर किया कि शाही जामा मस्जिद मंदिर की जगह पर बनी है। अदालत के आदेश पर उसी दिन (19 नवंबर) और फिर 24 नवंबर को सर्वे कराया गया। दूसरा सर्वे हिंसा में बदल गया, जिसमें चार मौतें हुईं और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, न्यायिक पैनल की रिपोर्ट का दावा है कि 1947 से अब तक हर दंगे में हिंदुओं को मुख्य निशाना बनाया गया और सांभर की हिंसा भी उसी साज़िश का हिस्सा थी। रिपोर्ट ने यूपी पुलिस की सराहना की है कि उसने “नरसंहार” को रोका और बताया कि दंगाई बाहर से लाए गए थे।
रिपोर्ट ने आंतरिक तकरार को तुर्क-पठान तनाव से जोड़ा है और कहा कि हरिहर मंदिर (जिसकी जगह कथित तौर पर मस्जिद बनाई गई) को लेकर बाबर की विरासत का ज़िक्र कर माहौल और बिगाड़ा गया।
रिपोर्ट के अनुसार, सांभर की जनसांख्यिकी में भारी बदलाव आया है—स्वतंत्रता के समय हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 15 प्रतिशत रह गई, जबकि मुस्लिम आबादी अब 85 प्रतिशत है। इसमें कट्टर संगठनों, अवैध हथियार और नशे के नेटवर्क को क्षेत्र अस्थिर करने के लिए सक्रिय किए जाने का भी आरोप है।
रिपोर्ट सांभर की सांप्रदायिक हिंसा का इतिहास भी बताती है, जिसमें 1953 का शिया-सुन्नी संघर्ष, 1956, 1959, 1962 (जब जनसंघ विधायक महेश गुप्ता की चाकू से हत्या हुई), 1966 और 1976 के बड़े दंगे शामिल हैं। 1976 में मस्जिद कमेटी विवाद और एक मौलवी की हत्या के बाद मंदिरों पर हमले हुए और कर्फ्यू लगा दिया गया था।
पीटीआई
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