ओबुलापुरम खनन घोटाले में IAS अधिकारी के खिलाफ मुकदमे की सुप्रीम कोर्ट ने स्थगित की सुनवाई

नई दिल्ली, 29 अगस्त (PTI) – सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बहुकरोड़ रुपये के ओबुलापुरम खनन कंपनी (OMC) मामले में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी वाई श्रीलक्ष्मी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

न्यायधीश एम एम सुन्दरश और एन के सिंह की बेंच ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ श्रीलक्ष्मी द्वारा दाखिल याचिका पर यह राहत दी। हाई कोर्ट ने उनकी डिश्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और फरूख राशिद ने तर्क दिया कि अधिकारी के खिलाफ मुकदमा प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को “बहुत विचित्र” बताया और इस मामले में CBI को नोटिस जारी किया है।

श्रीलक्ष्मी, जो 2006 से 2009 के बीच आंध्र प्रदेश के उद्योग और वाणिज्य विभाग की सचिव थीं, को CBI की तरफ से घोटाले में शामिल मानते हुए एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपित किया गया था।

उन्होंने ट्रायल कोर्ट में डिश्चार्ज की मांग की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ केवल शक है, कोई ठोस आरोप नहीं है। लेकिन 2022 में उनकी याचिका खारिज हो गई।

फिर उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया, जिसने 8 नवम्बर 2022 को उन्हें डिस्चार्ज दिया। CBI ने सुप्रीम कोर्ट में इसका विरोध किया, जहां मई 2023 में हाई कोर्ट का निर्णय रद करके मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया गया।

नए विचार के बाद हाई कोर्ट ने उनकी रिवीजन याचिका खारिज कर मुकदमे को पुनः शुरू कर दिया था।

CBI ने आरोप लगाया है कि श्रीलक्ष्मी ने ओबुलापुरम कंपनी को अनुचित सुविधाएं देते हुए “कैप्टिव माइनिंग” की शर्त खत्म कर दी थी और दो सरकारी नोटिफिकेशन जारी किए थे, जो खनन कानूनों का उल्लंघन था।

उन पर आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत आरोप हैं।

ओबुलापुरम घोटाले में पूर्व कर्नाटक मंत्री गली जनार्दन रेड्डी को भी दोषी ठहराया गया है और उनकी अपील लंबित है।

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