शिमला, 30 अगस्त (PTI) – मणिमहेश यात्रा के दौरान भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलनों के बीच 50 किलोमीटर पैदल चलने का संघर्ष करने वाले हमीरपुर के स्थानीय निवासियों ने शुक्रवार रात घर पहुँचकर अपनी दिक्कतों का ब्योरा दिया। मोबाइल नेटवर्क की कमी और लगातार होती झमाझम बारिश ने मौसम को और बदतर बना दिया था।
मणिमहेश यात्रा 17 अगस्त से शुरू होकर सितंबर में समाप्त होनी थी, लेकिन भारी बारिश के कारण 24 अगस्त को चम्बा क्षेत्र में यात्रा स्थगित कर दी गई थी। भरमौर इलाका अभी भी सड़क एवं मोबाइल कनेक्टिविटी से कट गया है।
हमीरपुर के सन्नी राणा ने बताया कि ‘बाबा बरफानी’ के दर्शन के बाद से लगातार मौसम खराब होता गया और कई जगह भूस्खलन हो गए। उन्होंने 50 किलोमीटर पैदल सफर करते हुए परेशानियों का सामना किया और अंततः भरमौर क्रॉसिंग तक पहुंचे, जहां से बस से घर लौटे।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चल रहे हैं और प्रशासन हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। हालांकि कनेक्टिविटी की कमी के कारण उनके रिश्तेदार चिंतित हैं। स्थानीय युवा लक्की ने बताया कि उनके रिश्तेदार मणिमहेश यात्रा पर थे और फोन नहीं लग रहे थे, लेकिन शनिवार सुबह संपर्क हो पाया।
चम्बा के जितेन ने प्रशासन और आपदा प्रबंधन की कमी पर सवाल उठाया। भारी बारिश और खतरनाक रास्तों पर पैदल यात्रा करना मजबूरी थी। अभी भी हजारों श्रद्धालु सुरक्षित स्थानों पर फंसे हुए हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भरमौर में जगह-जगह पहुंच कर हवाई सर्वेक्षण किया और सुरक्षित स्थानों पर यात्रियों को पहुँचाने की व्यवस्था की। मौसम ठीक रहने पर छोटे हेलीकॉप्टरों से एयरलिफ्टिंग का भी प्रबंध किया जाएगा।
अब तक 3,000 से अधिक श्रद्धालु सुरक्षित ज़िलों को निकाले गए, जिसमें 23 लोग मुश्किल जगहों से बचाए गए और पांच मृतकों के शव बरामद किए गए।
स्पेशल टीमों को ISAT फोन, मेडिकल किट, बचाव उपकरण और पर्वतारोहण गियर से लैस कर बचाव कार्य में लगाया गया है।
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