
नई दिल्ली, 31 अगस्त (पीटीआई) भारत को यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में “अनुचित रूप से निशाना” नहीं बनाया जाना चाहिए, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अपनी फ़िनलैंड की समकक्ष एलीना वाल्टोनेन के साथ टेलीफोन पर बातचीत के बाद कहा।
इन टिप्पणियों को वॉशिंगटन के उन आरोपों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिनमें कहा गया था कि नई दिल्ली रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर मॉस्को की “वार मशीन” की मदद कर रहा है।
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा,
“हमारी चर्चाएं यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर केंद्रित रहीं। भारत को उस संदर्भ में अनुचित रूप से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। हम हमेशा संवाद और कूटनीति की वकालत करते रहे हैं।”
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने इस हफ्ते कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क सिर्फ भारत के “अनुचित व्यापार” के बारे में नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य नई दिल्ली द्वारा मॉस्को की “वार मशीन” को दी जा रही “वित्तीय जीवनरेखा” को भी काटना है।
भारत पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुका है।
हैरानी की बात है कि अमेरिका चीन की आलोचना नहीं कर रहा, जो कि रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है।
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