बिहार SIR: दावे, आपत्तियां 1 सितंबर की सीमा के बाद भी दाखिल की जा सकती हैं, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

नई दिल्ली, 1 सितंबर (PTI) – भारत चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत तैयार प्रारूप मतदाता सूची में दावे, आपत्ति और सुधार 1 सितंबर की अंतिम तिथि के बाद भी दाखिल किए जा सकते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम मतदाता सूची की घोषणा के बाद ही परखा जाएगा।

चुनाव आयोग के अनुसार, हर विधानसभा क्षेत्र में नामांकन फॉर्म की अंतिम तिथि तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वे मतदाताओं और पार्टियों को दावे और आपत्तियां दाखिल करने में मदद के लिए पैरालीगल स्वयंसेवकों की तैनाती करें। ये स्वयंसेवक अपनी रिपोर्ट 8 सितंबर तक उच्च न्यायालय को देंगे।

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि समय सीमा बढ़ाने से मतदाता सूची के अंतिम रूप पर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यह 30 सितंबर तक प्रकाशित करनी है। लगभग 99.5% मतदाताओं ने अपनी पात्रता दस्तावेज जमा कर लिए हैं।

RJD द्वारा 36 दावे लगाए जाने के आरोप को चुनाव आयोग ने गलत बताया, सही संख्या केवल 10 है, हालांकि सभी दावा बूथ स्तर अधिकारियों द्वारा स्वीकार किए गए हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि 22 अगस्त से 30 अगस्त तक कुल 22,723 दावे नाम जोड़ने और 1,34,738 आपत्तियां नाम हटाने के लिए दर्ज की गईं।

अधिवक्ता कपिल सिबल और शोएब आलम ने निवेदन किया कि आधार कार्ड को पात्रता दस्तावेज माना जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जून 24 के आदेश के अनुपालन पर ध्यान देने और नाम हटाने की उच्च संख्या पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने राजनीतिक दलों को सक्रिय होने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित की है।

इस विवादित SIR प्रक्रिया ने बिहार की मतदाता संख्या को 7.9 करोड़ से घटाकर लगभग 7.24 करोड़ कर दिया है, जो कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।

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