नई दिल्ली, 1 सितंबर (PTI) – दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों को प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, खाद्य सुरक्षा और अस्वस्थ आहार के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक करें।
पिछले सप्ताह जारी एक सर्कुलर में शिक्षा निदेशालय ने बच्चों को प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के फायदे और नुकसान दोनों से अवगत कराने का महत्व बताया। जहां खाद्य प्रसंस्करण से खाद्य सुरक्षा, स्वाद और वैधता बढ़ती है, वहीं अत्यधिक शक्कर, नमक और वसा वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं।
यह सलाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 29 जून के ‘मन की बात’ के अनुरोध के बाद आई है, जिसमें उन्होंने मोटापा रोकने और समग्र स्वास्थ्य बढ़ाने के लिए तेल और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की खपत कम करने पर जोर दिया था।
सर्कुलर में कहा गया है कि छात्रों को ‘बैगलेस डे’ पर खाद्य पदार्थों में उपयोग होने वाले कीटनाशक, उर्वरक और एडिटिव्स के बारे में सीखने का अवसर दिया जाना चाहिए, साथ ही बाजार में उपलब्ध प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ कैसे तैयार होते हैं, यह भी समझाया जाना चाहिए।
इसके अलावा, बच्चों को खाद्य प्रसंस्करण के वैज्ञानिक सिद्धांत, नवाचार और स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में शिक्षित करना उन्हें सूचित निर्णय लेने, भ्रांतियों को दूर करने और खाद्य तकनीक तथा पोषण से संबंधित करियर में रुचि जगाने में सक्षम करेगा।
स्कूलों को CBSE के पोषण जागरूकता अभियानों के अनुरूप अपनी गतिविधियाँ संचालित करने को कहा गया है। शिक्षा विभाग ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल की खपत 10 प्रतिशत घटाने की सलाह भी जारी की है।
साथ ही, स्कूल प्रमुखों को उनके किए गए कार्यों की रिपोर्ट 20 सितंबर तक स्वास्थ्य और स्कूल शाखा को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
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