पेरिस, 10 सितम्बर (एपी):
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार देर रात रक्षा मंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया और उन्हें तुरंत ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के लिए बजट पर सहमति बनाने के लिए आपस में उलझे राजनीतिक दलों से बातचीत करने का जिम्मा सौंपा।
39 वर्षीय लेकोर्नू फ्रांस के इतिहास में सबसे युवा रक्षा मंत्री रहे हैं और उन्होंने 2030 तक के लिए एक बड़े सैन्य विस्तार की योजना बनाई थी, जिसे रूस-यूक्रेन युद्ध ने और तेज़ कर दिया। मैक्रों के लंबे समय से वफादार माने जाने वाले लेकोर्नू अब मुश्किल से एक साल में फ्रांस के चौथे प्रधानमंत्री बने हैं।
पूर्व में एक कंज़र्वेटिव नेता रहे लेकोर्नू 2017 में मैक्रों की मध्यमार्गी (सेंटरिस्ट) पार्टी में शामिल हुए थे। उन्होंने स्थानीय सरकारों, विदेशी क्षेत्रों में पद संभाले और मैक्रों के “येलो वेस्ट आंदोलन” के दौरान हुए “ग्रेट डिबेट” में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2021 में ग्वाडेलोप में अशांति के दौरान उन्होंने स्वायत्तता पर बातचीत की पेशकश की थी।
उनका उभार मैक्रों की वफादारी को पुरस्कृत करने की प्रवृत्ति और साथ ही राजनीतिक निरंतरता की आवश्यकता को दर्शाता है। हालिया बजट टकराव ने उनके पूर्ववर्तियों को गिरा दिया और फ्रांस को अस्थिरता की ओर धकेल दिया।
लेकोर्नू की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब बुधवार को “ब्लॉक एवरीथिंग” नामक आंदोलन ने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसे देखते हुए सरकार ने 80,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।
सोमवार को सांसदों ने लेकोर्नू के पूर्ववर्ती फ्रांस्वा बैरू और उनकी सरकार को अविश्वास प्रस्ताव में हटा दिया। बैरू का मानना था कि फ्रांस को भारी कर्ज को काबू में रखने के लिए सार्वजनिक खर्चों में कटौती करनी चाहिए, लेकिन सांसदों ने 74 वर्षीय इस नेता के खिलाफ एकजुट होकर उनकी अल्पसंख्यक सरकार को गिरा दिया।
बैरू की सरकार के पतन से यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने नई अनिश्चितता और लंबे राजनीतिक गतिरोध का खतरा पैदा हो गया है। इस बीच फ्रांस को बजट संकट, यूक्रेन और गाजा में युद्ध और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बदलती नीतियों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
लेकोर्नू की प्राथमिकता बजट तैयार करना होगा। सामान्यतः नया प्रधानमंत्री पहले सरकार गठित करता है और फिर संसद में बजट पर चर्चा करता है, लेकिन इस बार मैक्रों ने लेकोर्नू से कहा है कि वह पहले सभी राजनीतिक दलों से परामर्श करें और उसके बाद ही अपनी टीम बनाएँ।
मैक्रों ने एक बयान में कहा, “प्रधानमंत्री की कार्यवाही हमारे स्वतंत्रता और शक्ति की रक्षा, फ्रांसीसी जनता की सेवा और हमारे देश की एकता के लिए राजनीतिक और संस्थागत स्थिरता से प्रेरित होगी।”
“येलो वेस्ट” आंदोलन के दौरान जब देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए, तब लेकोर्नू को “ग्रेट डिबेट” का नेतृत्व सौंपा गया था।
2020 से 2022 तक वे विदेश क्षेत्रों के मंत्री रहे और ग्वाडेलोप में कोविड से जुड़ी अशांति और हड़तालों से निपटे। यहाँ उन्होंने लंबे समय से मौजूद असमानताओं के कारण कुछ स्वायत्तता पर बातचीत की पेशकश की।
लेकोर्नू द्वारा 2024-2030 के लिए पेश किया गया 413 अरब यूरो (435 अरब डॉलर) का रक्षा बजट फ्रांस के पिछले पचास वर्षों में सबसे बड़ा रक्षा व्यय है। इस राशि से परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाने, खुफिया खर्च बढ़ाने और रिमोट-कंट्रोल हथियारों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।
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