
तिरुपति, 14 सितंबर (पीटीआई) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को यहाँ कहा कि महिला आरक्षण कानून नेताओं की एक नई पीढ़ी तैयार करेगा जो नीतियों को आकार देंगे, प्रगति की शुरुआत करेंगे और भारत का भविष्य तय करेंगे।
महिला सशक्तिकरण पर संसदीय और विधायी समितियों के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, बिरला ने छात्राओं में शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल करने पर ज़ोर दिया और कहा कि भारत तभी एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकता है जब उसकी बेटियाँ शिक्षित और आत्मनिर्भर होंगी।
बिरला ने कहा, “भारत की कहानी का अगला अध्याय निस्संदेह उसकी सशक्त महिलाओं द्वारा लिखा जाएगा।”
आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में 20 राज्यों के प्रतिनिधियों, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, आंध्र प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सी अय्यन्नापत्रुडु और भाजपा नेता एवं महिला सशक्तिकरण पर संसदीय समिति की अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी सहित अन्य ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को सम्मेलन में भाग लेना था, लेकिन खराब मौसम के कारण वे तिरुपति नहीं पहुँच सके।
सभा को संबोधित करते हुए, बिरला ने कहा कि महिला आरक्षण कानून केवल प्रतीकात्मकता से आगे बढ़कर महिलाओं को शासन में उनका उचित स्थान प्रदान करता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “यह महिला नेताओं की एक नई पीढ़ी का निर्माण करेगा जो नीतियों को आकार देंगी, प्रगति को गति देंगी और भारत की भविष्य की दिशा तय करेंगी।”
बिरला ने कहा कि यह गर्व की बात है कि नए संसद भवन में पारित पहला विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम था, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान हैं।
उन्होंने कहा कि विज्ञान से लेकर साहित्य तक, खेल से लेकर अंतरिक्ष अन्वेषण तक, भारतीय महिलाओं ने हर क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है।
बिरला ने कहा, “भारत में दृढ़निश्चयी महिला नेताओं की कोई कमी नहीं है जिनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक बाधाओं को पार किया, अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया और सामाजिक परिवर्तन की लहर चलाई।”
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “आज महिलाएँ केवल भागीदार ही नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता, नवप्रवर्तक, पालनकर्ता और उद्यमी भी हैं। अंतरिक्ष मिशनों से लेकर ग्राम पंचायतों तक, रसोई से लेकर बोर्डरूम तक, महिलाएँ अधिक स्वतंत्रता, शक्ति और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रही हैं।”
उन्होंने कहा कि संसदीय समितियाँ हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करती हैं, जिसका लक्ष्य महिला सशक्तिकरण की राह में आने वाली चुनौतियों को दूर करना और राष्ट्र निर्माण के नए रास्ते प्रशस्त करना है।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि जहाँ कई विकसित लोकतंत्रों ने महिलाओं के अधिकारों को मान्यता देने में समय लिया, वहीं भारत के संविधान ने हमेशा महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक विकास का एक अभिन्न अंग माना है।
उन्होंने कहा कि भारत में पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 14.5 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं और ऐतिहासिक महिला आरक्षण कानून यह सुनिश्चित करेगा कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएँ राष्ट्रीय नेतृत्व का हिस्सा बनें। पीटीआई एसकेयू केवीके केवीके
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