संयुक्त राष्ट्र, 19 सितम्बर (एपी): संयुक्त राज्य अमेरिका ने गुरुवार को एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया जिसमें गाजा में तत्काल और स्थायी युद्धविराम तथा बंधकों की रिहाई की मांग की गई थी। अमेरिका ने कहा कि यह प्रयास हमास की पर्याप्त निंदा करने में विफल रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था के 14 अन्य सदस्य देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इसमें गाजा की मानवीय स्थिति को “विनाशकारी” बताया गया और 21 लाख फिलिस्तीनियों तक राहत सामग्री पहुंचाने पर लगे सभी प्रतिबंध हटाने का आह्वान किया गया।
अमेरिकी नीति सलाहकार मॉर्गन ऑर्टागस ने मतदान से पहले कहा, “इस प्रस्ताव का अमेरिका द्वारा विरोध कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इसमें हमास की निंदा नहीं की गई है, न ही इज़राइल के आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता दी गई है। यह हमास को फायदा पहुंचाने वाली झूठी कथाओं को वैधता देता है।”
प्रस्ताव पास न होने से अमेरिका और इज़राइल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक अलग-थलग स्थिति उजागर हुई है। यह वोट वार्षिक संयुक्त राष्ट्र महासभा से कुछ दिन पहले हुआ है, जहां गाजा मुद्दा प्रमुख रहेगा और कई अमेरिकी सहयोगी देश फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की उम्मीद है।
फिलिस्तीनी राजदूत रियाद मंसूर ने निराशा जताते हुए कहा कि फिलिस्तीनी जनता के गुस्से और पीड़ा को समझा जा सकता है, जो इस बैठक को देखते हुए उम्मीद कर रही थी कि उनका दुःस्वप्न खत्म होगा।
अल्जीरिया और पाकिस्तान ने भी इस नाकाम प्रयास पर असंतोष व्यक्त किया। इज़राइल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा कि यह प्रस्ताव बंधकों की रिहाई नहीं कराएगा और न ही क्षेत्र में सुरक्षा लाएगा।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की एक रिपोर्ट में कहा गया कि इज़राइल गाजा में नरसंहार कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग आधे अमेरिकी मानते हैं कि गाजा में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई “बहुत आगे बढ़ गई है।”
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