रिपोर्ट: जलवायु सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन बढ़ा रहे देश

Stockholm Environment Institute

नई दिल्ली, 22 सितम्बर (पीटीआई)। एक नई रिपोर्ट ने सोमवार को चेतावनी दी कि देश 2030 तक जितना जीवाश्म ईंधन उत्पादन करने की योजना बना रहे हैं, वह 1.5 डिग्री सेल्सियस तक वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए आवश्यक स्तर से दोगुना है।

प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट 2025 के अनुसार, सरकारों की कोयला, तेल और गैस उत्पादन योजनाएं 1.5 डिग्री पथ से 120 प्रतिशत और 2 डिग्री पथ से 77 प्रतिशत अधिक हैं।

साल 2025 में पेरिस समझौते के दस वर्ष पूरे होंगे, जिसके तहत देशों ने तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित करने और इसे 2 डिग्री से नीचे रखने का संकल्प लिया था। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारें अब कोयले के उत्पादन को 2035 तक, गैस उत्पादन को 2050 तक और तेल उत्पादन को सदी के मध्य तक बढ़ाने की योजना बना रही हैं।

स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट और क्लाइमेट एनालिटिक्स द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया, “यह सामूहिक विफलता दर्शाती है कि खोए हुए समय की भरपाई के लिए आने वाले दशकों में जीवाश्म ईंधन उत्पादन को और भी तेजी से घटाना होगा।”

20 प्रमुख उत्पादक देशों (जिनमें भारत, अमेरिका, चीन, रूस, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं) के आकलन में पाया गया कि इनमें से 17 देश 2030 तक कम से कम एक जीवाश्म ईंधन का उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इनमें से 11 देशों ने पिछले दो वर्षों की तुलना में कोयला, तेल या गैस उत्पादन बढ़ाने की उम्मीद जताई है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक कोयला उत्पादन 1.5 डिग्री पथ की तुलना में 500 प्रतिशत, तेल 31 प्रतिशत और गैस 92 प्रतिशत अधिक होगा। जबकि वैज्ञानिक सहमति है कि 2040 तक कोयले का उपयोग लगभग समाप्त होना चाहिए और 2050 तक तेल व गैस उत्पादन में तीन-चौथाई की कटौती होनी चाहिए।

रिपोर्ट ने चेताया कि नई अवसंरचना में भारी निवेश के कारण जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और बढ़ रही है, जिससे भविष्य में कटौती करना कठिन और महंगा होगा। इसके अलावा, सब्सिडी का वित्तीय बोझ भी रिकॉर्ड स्तर के करीब बना हुआ है क्योंकि सरकारें कर छूट, सार्वजनिक निवेश और नए अन्वेषण ब्लॉकों को खोलकर उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही हैं।

हालांकि रिपोर्ट ने कुछ सकारात्मक कदमों का भी उल्लेख किया — जर्मनी ने अपने कोयला चरणबद्ध बंद करने की समयसीमा आगे बढ़ाई है, ब्राजील ने ऊर्जा संक्रमण त्वरक कार्यक्रम शुरू किया है, चीन ने 2030 का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य छह साल पहले ही हासिल कर लिया और कोलंबिया ने न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण का रोडमैप अपनाया है। लेकिन, रिपोर्ट का कहना है कि दुनिया के बड़े उत्पादकों की विस्तार योजनाओं ने इन प्रयासों को ढक दिया है।

अमेरिका ने इस साल संघीय नेट-जीरो आदेश रद्द करने के बाद अब तेल, गैस और कोयले का उत्पादन उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की योजना बनाई है। भारत, जिसने 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य रखा है, निकट भविष्य में कोयला उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। रूस, सऊदी अरब और चीन भी उत्पादन विस्तार की श्रेणी में शामिल हैं।

जैसे-जैसे देश इस साल पेरिस समझौते के तहत अपनी अगली जलवायु प्रतिज्ञाएं जमा करने की तैयारी कर रहे हैं, रिपोर्ट ने उनसे आग्रह किया है कि वे अपनी राष्ट्रीय रणनीतियों में जीवाश्म ईंधन उत्पादन में कटौती की योजनाओं को स्पष्ट रूप से शामिल करें और एक न्यायसंगत संक्रमण के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करें।

पीटीआई GVS RHL

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