
नई दिल्ली, 23 सितंबर (पीटीआई) इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही समिति की मदद के लिए दो वकीलों को नियुक्त किया गया है।
रोहन सिंह और समीक्षा दूआ को तीन सदस्यीय समिति की सहायता के लिए सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है, जिसे न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के आधारों की जांच के लिए गठित किया गया है।
पिछले महीने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बहु-दलीय महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार किया था। यह प्रस्ताव न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लाया गया था, जिनके सरकारी आवास पर 14 मार्च को जली हुई करंसी की गड्डियां बरामद हुई थीं।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी. वी. आचार्य शामिल हैं।
दोनों वकीलों की नियुक्तियों की अधिसूचना 19 सितंबर को जारी की गई थी और ये नियुक्तियां समिति के कार्यकाल तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।
दिल्ली हाई कोर्ट से प्रतिनियुक्ति पर आए न्यायमूर्ति वर्मा को 14 मार्च को उनके आवास पर जली हुई करंसी की गड्डियां बरामद होने के बाद वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच पैनल, जिसकी अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने की थी, ने इस घटना की जांच की थी।
अपनी रिपोर्ट में पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार का उस स्टोर रूम पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण था, जहां नकदी बरामद हुई थी। यह कदाचार इतना गंभीर था कि उनके हटाए जाने का आधार बन गया।
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की थी।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
एसईओ टैग्स: #swadesi, #News, न्यायमूर्ति वर्मा भ्रष्टाचार जांच में पैनल की मदद के लिए दो वकील नियुक्त
