हरित घोटाला: संयुक्त राष्ट्र में डूबते राष्ट्रों के नेताओं की मौजूदगी में ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन की अवधारणा पर हमला बोला

President Donald Trump speaks to the United Nations General Assembly, Tuesday, Sept. 23, 2025, in New York. (AP Photo/Evan Vucci)(AP09_23_2025_000414B)

न्यूयॉर्क, 24 सितम्बर (एपी) — कुछ देशों के नेता देख रहे हैं कि बढ़ते समुद्र उनके घरों को निगलने की धमकी दे रहे हैं। अन्य अपने नागरिकों को बाढ़, तूफान और गर्मी की लहरों में मरते देख रहे हैं, जो सभी जलवायु परिवर्तन से और भी गंभीर हो रहे हैं।

लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में जो दुनिया का चित्रण किया, वह उस वास्तविकता से मेल नहीं खाता जिसका सामना कई विश्व नेता कर रहे हैं। न ही यह वैज्ञानिकों के लंबे समय से दिए जा रहे अवलोकनों से मेल खाता है।

ट्रंप ने कहा, “यह जलवायु परिवर्तन, मेरे विचार में, दुनिया पर थोपे गए सबसे बड़े छल-कपट में से एक है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य द्वारा की गई ये सारी भविष्यवाणियां गलत थीं। इन्हें मूर्ख लोगों ने किया, जिन्होंने अपने देशों को बर्बाद किया। अगर आप इस ग्रीन स्कैम से नहीं हटते हैं, तो आपका देश असफल हो जाएगा।”

ट्रंप लंबे समय से जलवायु विज्ञान और पवन व सौर जैसे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों के आलोचक रहे हैं। लेकिन उनका मंगलवार का भाषण अब तक के सबसे व्यापक बयानों में से एक था। इसमें कई झूठे दावे और असंबंधित बातों को जोड़ने की कोशिश शामिल थी।

पलाऊ की राजदूत इलाना सैड, जो छोटे द्वीपीय राष्ट्रों के संगठन की प्रमुख हैं, ने कहा कि यह वही है जिसकी उन्हें ट्रंप और अमेरिका से उम्मीद थी। उन्होंने जोड़ा कि जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई न करना “सबसे कमजोरों के साथ विश्वासघात होगा।” मलावी के इवांस डैवी न्जेवा ने भी यही कहा कि “हम दुनिया के निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।”

बहामास की जलवायु वैज्ञानिक अडेल थॉमस, जो संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन पैनल की उपाध्यक्ष हैं, ने कहा कि उन्होंने 2012 में हरिकेन सैंडी के दौरान जलवायु आपदा की विनाशकारी स्थिति खुद झेली है। उन्होंने कहा, “लाखों लोग पहले ही जलवायु परिवर्तन की तबाही का अनुभव कर चुके हैं। यह साक्ष्य अमूर्त नहीं है। यह वास्तविक है, घातक है और तत्काल कार्रवाई की मांग करता है।”

ट्रंप के दावे और वैज्ञानिक प्रतिक्रियाएँ:

  1. नवीकरणीय ऊर्जा पर:
  2. ट्रंप ने पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को “मज़ाक” और “दुर्बल” कहा। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की जुलाई रिपोर्ट के अनुसार, सौर और पवन अब नई बिजली उत्पादन के लिए सबसे सस्ते और तेज़ विकल्प हैं।
  3. बिजली बिलों पर:
  4. ट्रंप ने कहा कि यूरोप में बिजली बिल अमेरिका से दो से तीन गुना ज़्यादा हैं। लेकिन अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, 2022 से अमेरिका में बिजली की कीमतें महंगाई से तेज़ बढ़ी हैं और 2026 तक बढ़ने की उम्मीद है।
  5. पेरिस समझौते पर:
  6. ट्रंप ने इसे “फर्जी” करार दिया और कहा कि अमेरिका अधिक भुगतान कर रहा था। पर वास्तव में, पेरिस समझौता 2015 में देशों की स्वेच्छा पर आधारित है, जहां हर देश अपने उत्सर्जन कम करने और आर्थिक योगदान तय करता है।
  7. कोयले पर:
  8. ट्रंप ने कहा कि इसे “क्लीन, ब्यूटीफुल कोल” कहा जाना चाहिए। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि कोयला हर साल लाखों लोगों की जान लेता है।
  9. कार्बन फुटप्रिंट पर:
  10. ट्रंप ने इसे “धोखा” कहा। विशेषज्ञों के अनुसार यह शब्द तेल कंपनियों ने जिम्मेदारी को व्यक्तियों पर डालने के लिए गढ़ा।
  11. गायों और मीथेन पर:
  12. ट्रंप ने कहा कि पर्यावरणविद गायों को खत्म करना चाहते हैं। लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, केवल मीथेन उत्सर्जन कम करना ज़रूरी है।

वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन की पर्यावरण नीतियों में ढील ने स्थानीय वायु और जल की गुणवत्ता को सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

एक्सेटर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर लूसी वुडॉल ने कहा, “समुद्री कचरे जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दे को इतनी गलत तरह से प्रस्तुत होते देखना दुखद है।”

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

SEO टैग्स: #स्वदेशी, #समाचार, हरित घोटाला: संयुक्त राष्ट्र में डूबते राष्ट्रों के नेताओं की मौजूदगी में ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन की अवधारणा पर हमला बोला