पणजी, 26 सितंबर (पीटीआई) — पूर्व राजदूत वी.एस. शेषाद्री ने कहा है कि अमेरिका की टैरिफ नीतियों में अस्थिरता और एकतरफा कदम, साथ ही चीन की “आर्थिक श्रेष्ठता और तकनीकी प्रभुत्व की कोशिश” और बढ़ती भू-राजनीतिक खाई ने वैश्विक व्यापार प्रणाली में उथल-पुथल पैदा कर दी है।
गुरुवार को इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (IIULER) में ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून: चुनौतियाँ और दृष्टिकोण’ पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा कि ये विकास अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए आवश्यक पूर्वानुमेयता और स्थिरता को कमजोर कर रहे हैं। यह व्याख्यान विदेश मंत्रालय की डिस्टिंग्विश्ड लेक्चर सीरीज़ का हिस्सा था।
पूर्व आईएफएस अधिकारी शेषाद्री, जिन्होंने स्लोवेनिया और म्यांमार में भारत के राजदूत के रूप में सेवा की, ने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन की रणनीतियाँ अलग-अलग हैं और ये तीनों देश मिलकर वैश्विक माल व्यापार का 42 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करते हैं। उन्होंने इन नीतियों के भारत पर प्रभाव पर भी प्रकाश डाला।
अमेरिका की व्यापार नीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने एकतरफा कदमों का दायरा बढ़ाया, यहां तक कि मुक्त व्यापार समझौते (FTA) साझेदारों पर भी टैरिफ लगाए। शेषाद्री ने कहा, “ये कदम अब केवल व्यापार संतुलन और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, अप्रवासन को सीमित करने, रूसी तेल के खरीदारों को दंडित करने और मादक पदार्थ तस्करी से निपटने जैसे व्यापक उद्देश्यों के लिए भी अपनाए जा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि ये उपाय अक्सर आपातकालीन अधिकारों या राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लागू किए जाते हैं, जो विकासशील देशों के लिए दी जाने वाली ‘आंशिक पारस्परिकता’ की लंबी परंपरा को कमजोर करते हैं। शेषाद्री ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए द्विपक्षीय समझौते अक्सर साझेदार देशों को ऊर्जा, कृषि और रक्षा आयात के लिए बाध्य करते हैं, जबकि टैरिफ में केवल आंशिक रियायत दी जाती है, जो WTO नियमों के विपरीत हो सकती है।
चीन के बारे में उन्होंने कहा कि जबकि बीजिंग खुद को वैश्वीकरण का समर्थक दिखाता है, उसके कार्य वास्तव में “आर्थिक प्रधानता और तकनीकी प्रभुत्व की कोशिश” को दर्शाते हैं। इसमें अतिरिक्त उत्पादन, आक्रामक बाजार अधिग्रहण और निर्भरता का हथियारबंद उपयोग शामिल है।
यूरोपीय संघ आम तौर पर बहुपक्षवाद का समर्थन करता है, लेकिन उसने भी संरक्षणवादी उपाय अपनाए हैं, जैसे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM), जिसकी WTO संगतता अब तक परीक्षण के अधीन है।
भारत के संदर्भ में शेषाद्री ने कहा कि देश का वैश्विक व्यापार में हिस्सा अभी भी केवल 2.3 प्रतिशत है, जिससे प्रभाव सीमित है, जबकि चीन के साथ व्यापार असंतुलन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की चार-स्तरीय रणनीति की सराहना की, जिसमें जोखिमपूर्ण निवेश और ऐप्स को ब्लॉक करना, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के जरिए घरेलू प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, सप्लाई चेन साझेदारियां बनाना और FTA पोर्टफोलियो का विस्तार शामिल है।
उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा, “एक पड़ोसी देश ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बहाने अपनी संसाधनों को अमेरिका के हवाले कर स्वयं को हानि पहुँचाने वाला रास्ता चुना है।” शेषाद्री ने अमेरिका में एक लंबित कानूनी चुनौती का भी उल्लेख किया, जो राष्ट्रपति के आपातकालीन उपायों के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को चुनौती देती है और इसे “सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मामला” बताया गया है, जिसका निर्णय अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
पीटीआई RPS NP
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