डेनमार्क के सैन्य प्रतिष्ठानों पर नए ड्रोन देखे गए; पूरे यूरोप में तनाव

बर्लिन, 27 सितंबर (एपी): डेनिश रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि “डेनमार्क के कई रक्षा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन देखे गए हैं।” शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक ड्रोन देखे जाने की ये नई घटनाएँ इस सप्ताह नॉर्डिक देश में हुई ऐसी कई घटनाओं के बाद आई हैं, जिनके कारण डेनिश हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था।

डेनमार्क में नवीनतम घटनाएँ

  1. करूप एयर बेस: कई स्थानीय मीडिया आउटलेट्स ने बताया कि करूप एयर बेस (जो डेनमार्क का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है) के पास या ऊपर एक या एक से अधिक ड्रोन देखे गए।
  2. रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया: रक्षा मंत्रालय ने करूप या अन्य जगहों पर इन घटनाओं की पुष्टि करने से इनकार कर दिया और कहा कि “परिचालन सुरक्षा और चल रही जांच के कारणों से, डेनमार्क रक्षा कमान ड्रोन देखे जाने के बारे में और अधिक जानकारी नहीं देना चाहती।”
  3. पिछले दिन की रिपोर्ट: मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि स्क्रीडस्ट्रुप एयर बेस और जटलैंड ड्रेगून रेजिमेंट में अतिरिक्त ड्रोन गतिविधि की खबरें शुक्रवार से शनिवार की रात को नहीं हुई थीं, बल्कि पहले की घटनाओं से संबंधित थीं।
  4. जनता में चिंता: हाल के दिनों में डेनमार्क में तनाव बढ़ गया है। हालांकि नागरिकों द्वारा सैकड़ों संभावित संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी गई है, लेकिन आधिकारिक तौर पर उनकी पुष्टि नहीं हो सकी है। फिर भी, जनता से सभी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने को कहा गया है।
  5. हवाई क्षेत्र बंद: सेंट्रल और वेस्ट जटलैंड पुलिस के ड्यूटी मैनेजर साइमन स्केल्कजेर के अनुसार, शुक्रवार को रात करीब 8 बजे करूप में एयर बेस की बाड़ के अंदर और बाहर दोनों जगह ड्रोन थे। नागरिक हवाई यातायात के लिए हवाई क्षेत्र को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था।

यूरोपीय देशों में बढ़ती सुरक्षा चिंताएँ

  1. रूस पर संदेह: बार-बार होने वाली इन अस्पष्ट ड्रोन गतिविधियों ने उत्तरी यूरोप में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, खासकर रूस की बढ़ती आक्रामकता के संदेह के बीच।
  2. जस्टिस मिनिस्टर का बयान: डेनमार्क के न्याय मंत्री पीटर हुमेलगार्ड ने गुरुवार को कहा कि इन उड़ानों का लक्ष्य डर और विभाजन पैदा करना है। देश ड्रोन को निष्क्रिय करने के लिए अतिरिक्त तरीके तलाशेगा, जिसमें बुनियादी ढांचे के मालिकों को उन्हें मार गिराने की अनुमति देने के लिए कानून प्रस्तावित करना भी शामिल है।
  3. स्वीडन की मदद: आगामी यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए, डेनमार्क ने स्वीडन से “एक सैन्य एंटी-ड्रोन क्षमता” उधार लेने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
  4. जर्मनी में रिपोर्ट: पड़ोसी जर्मनी के उत्तरी श्लेस्विग-होल्स्टीन राज्य में भी ड्रोन देखे जाने की सूचना मिली है। आंतरिक मंत्री सबाइन सटरलिन-वाक ने कहा कि राज्य पुलिस ड्रोन रक्षा उपायों को काफी बढ़ा रही है।
  5. जर्मन चांसलर की टिप्पणी: जर्मन चांसलर फ्रीड्रिक मेर्ज़ ने कहा कि बुनियादी ढांचे और डेटा नेटवर्क पर लगातार हो रहे हमलों के संबंध में, “हम युद्ध में नहीं हैं, लेकिन हम अब शांति में भी नहीं रह रहे हैं।” उन्होंने ‘टियरगार्टन हत्याकांड’ (एक राजनीतिक हत्या) और साइबर हमलों जैसी घटनाओं का भी हवाला दिया।
  6. शफोल एयरपोर्ट पर बंद: एम्स्टर्डम के शिफोल एयरपोर्ट पर भी ड्रोन देखे जाने की सूचना के बाद एक रनवे को लगभग 45 मिनट के लिए बंद करना पड़ा था।

नाटो की कड़ी प्रतिक्रिया

  1. एयरस्पेस उल्लंघन: नाटो की सैन्य समिति के अध्यक्ष, एडमिरल ग्यूसेप कावो ड्रैगोन ने कहा कि रूसी विमानों और ड्रोनों को अब ‘ईस्टर्न सेंट्री’ गतिविधि की ओर से दृढ़ प्रतिक्रिया मिलेगी।
  2. पूर्ण जिम्मेदारी: ड्रैगोन ने कहा, “इन कार्यों के लिए रूस पूरी जिम्मेदारी लेता है।” उन्होंने पोलैंड और एस्टोनिया के हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का जिक्र करते हुए गठबंधन के सभी सहयोगियों के प्रति पूरी एकजुटता व्यक्त की।

बढ़ते ड्रोन हमलों से निपटने के लिए, यूरोप द्वारा सीमाओं पर विकसित की जा रही “ड्रोन वॉल” तकनीक क्या है और यह कितनी प्रभावी हो सकती है?

बढ़ते ड्रोन हमलों के जवाब में यूरोपीय “ड्रोन वॉल” और नाटो का “ईस्टर्न सेंट्री” मिशन

डेनमार्क के सैन्य अड्डों पर बार-बार ड्रोन देखे जाने की घटनाओं के बाद, यूरोप अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठा रहा है, जिसका उद्देश्य रूस के कथित “हाइब्रिड हमलों” से निपटना है। इसका एक प्रमुख हिस्सा “ड्रोन वॉल” नामक एक परियोजना है, जिस पर यूरोपीय संघ (EU) के रक्षा मंत्री सहमत हुए हैं।

यूरोपीय “ड्रोन वॉल” परियोजना

यूरोपीय “ड्रोन वॉल” एक प्रस्तावित, महाद्वीप-व्यापी रक्षा प्रणाली है जिसे रूस और यूक्रेन के साथ लगने वाली सीमाओं के किनारे विकसित किया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य यूरोपीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाले ड्रोनों का बेहतर ढंग से पता लगाना, उन्हें ट्रैक करना और रोकना है।

इस परियोजना के मुख्य तकनीकी और परिचालन लक्ष्य हैं:

  1. प्रभावी पहचान प्रणाली (Effective Detection System): परियोजना की सर्वोच्च प्राथमिकता रडार और ध्वनिक सेंसर जैसे उन्नत उपकरणों का एक नेटवर्क विकसित करना है, जो छोटे, धीमे और कम उड़ने वाले ड्रोनों का पता लगा सके जिन्हें पारंपरिक सैन्य रडार अनदेखा कर सकते हैं।
  2. ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता (Interception Capability): पहचान के बाद, प्रणाली में ड्रोन को निष्क्रिय करने या नष्ट करने की क्षमता शामिल होगी। इसमें इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीक, एंटी-ड्रोन हथियार और यहाँ तक कि महंगे लड़ाकू विमानों के उपयोग के बजाय ड्रोन को मार गिराने के लिए कम लागत वाले नए हथियार विकसित करना भी शामिल हो सकता है।
  3. यूक्रेन से सबक: यूरोपीय संघ के अधिकारी यूक्रेन के अनुभव से सीख लेने पर जोर दे रहे हैं, जिसने रूस के खिलाफ युद्ध में ड्रोन-रोधी प्रणालियों और मोबाइल फायर टीमों का उपयोग करने के सस्ते तरीके विकसित किए हैं।
  4. गठबंधन और सहयोग: यह परियोजना यूरोपीय संघ के पूर्वी छोर पर स्थित देशों (जैसे फ़िनलैंड, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया और पोलैंड) के संयुक्त प्रयासों पर आधारित होगी, जिसका उद्देश्य पूरे यूरोपीय क्षेत्र में एक एकीकृत और सहयोगात्मक रक्षा बनाना है।

यूरोपीय अधिकारियों का अनुमान है कि इस “ड्रोन वॉल” को पूरी तरह से बनाने में लगभग एक साल लग सकता है, लेकिन वे इसे जल्द से जल्द साकार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

नाटो का “ईस्टर्न सेंट्री” (Eastern Sentry) मिशन

ड्रोन वॉल के अलावा, नाटो (NATO) ने भी रूस द्वारा हवाई क्षेत्र के बार-बार किए गए उल्लंघन के जवाब में अपनी सुरक्षा मुद्रा को मजबूत करने के लिए “ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री” लॉन्च किया है।

  1. उद्देश्य: इस मिशन का उद्देश्य नाटो की पूर्वी सीमा पर सैन्य खतरों का मुकाबला करने के लिए, विशेष रूप से रूसी ड्रोनों को रोकने के लिए, नाटो की क्षमता को बढ़ाना है। यह पूर्वी हिस्से के साथ हवाई रक्षा के लिए एक सामूहिक नीति और आचरण स्थापित करता है।
  2. परिसंपत्तियों की तैनाती: ईस्टर्न सेंट्री में कई सहयोगी देशों की परिसंपत्तियों का इस्तेमाल शामिल है, जिसमें लड़ाकू जेट (जैसे डेनमार्क के F−16 और जर्मनी के यूरोफाइटर), साथ ही एंटी-ड्रोन चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीकें शामिल हैं।
  3. तत्काल कार्रवाई: यह मिशन पोलैंड के हवाई क्षेत्र में रूसी ड्रोनों के घुसपैठ के तुरंत बाद शुरू किया गया था और यह नाटो की त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया देने की दृढ़ता को दर्शाता है।

यूरोप के कई हिस्सों में इस तरह के सुरक्षा और संप्रभुता के उल्लंघन के बीच, क्या आपको लगता है कि इस “हाइब्रिड युद्ध” का लक्ष्य केवल डर फैलाना है, या इसके पीछे कोई बड़ा सैन्य या खुफिया उद्देश्य हो सकता है?