
जयपुर, 6 अक्टूबर (पीटीआई) — जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में रविवार देर रात लगी आग में छह गंभीर मरीजों की मौत हो गई, अधिकारियों ने बताया।
ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. अनुराग धाकड़ ने कहा कि न्यूरो आईसीयू में कुल 11 मरीजों का इलाज चल रहा था, जब स्टोरेज एरिया में आग लगी। आशंका है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए एक्स (X) पर हिंदी में लिखा, “जयपुर, राजस्थान के एक अस्पताल में आग लगने की दुखद घटना में लोगों की मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक है। दिवंगतों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
अधिकारियों के अनुसार, मृतकों की पहचान सीकर के पिंटू, जयपुर के दिलीप और बहादुर, तथा भरतपुर के श्रीनाथ, रुक्मिणी और खुर्मा के रूप में की गई है।
डॉ. धाकड़ ने बताया, “इनमें दो महिलाएं और चार पुरुष शामिल थे। बाकी 14 मरीज दूसरे आईसीयू में भर्ती थे, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया।”
आग लगने के बाद भवन में घना धुआं फैल गया, जिससे मरीजों और परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। कई दस्तावेज, आईसीयू उपकरण और दवाएं आग में नष्ट हो गए।
अस्पताल कर्मचारियों और परिचारकों ने मरीजों को बाहर निकाला — कुछ को स्ट्रेचर और बेड समेत इमारत के बाहर ले जाया गया। दमकल विभाग ने लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
विकास, जो वार्ड बॉय हैं, ने पीटीआई को बताया कि उन्होंने और उनके साथियों ने आग भड़कने से पहले जितने संभव हो सके, मरीजों को बाहर निकाला।
उन्होंने कहा, “हम ऑपरेशन थिएटर में थे जब आग लगने की खबर मिली। हम तुरंत दौड़कर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और तीन-चार मरीजों को बाहर निकालने में सफल रहे। लेकिन आग बढ़ने के बाद धुआं इतना घना हो गया कि अंदर जाना असंभव था। हमने अपनी पूरी कोशिश की।”
उन्होंने बताया कि पुलिस बाद में पहुंची, लेकिन भारी धुएं के कारण वह तुरंत अंदर नहीं जा पाई।
दमकलकर्मियों को आग बुझाने के लिए खिड़की तोड़नी पड़ी क्योंकि पूरा वार्ड धुएं से भर गया था।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेधम ने ट्रॉमा सेंटर का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
शुरुआत में जब पटेल और बेधम पहुंचे, तो कुछ मरीजों के परिजनों ने रोष व्यक्त किया, आरोप लगाया कि अस्पताल कर्मियों ने शुरुआती चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया और आग लगने पर भाग गए। उन्होंने यह भी शिकायत की कि अस्पताल प्रशासन मरीजों की स्थिति की जानकारी नहीं दे रहा था।
एक परिचारक ने कहा, “हमने धुआं देखा और तुरंत स्टाफ को बताया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। जब आग लगी, तो सबसे पहले वही भागे। अब हमें अपने मरीजों की कोई जानकारी नहीं मिल रही। कोई हमें नहीं बता रहा कि वे कैसे हैं।”
बाद में मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों और मरीजों से बातचीत की और स्थिति का आकलन किया।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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