भारत की एजुकेट गर्ल्स को मिला मैग्सेसे पुरस्कार वैश्विक प्राथमिकता का प्रतीक: संस्थापक

The Foundation to Educate Girls Globally, has been awarded the 2025 Ramon Magsaysay Award for its work educating out-of-school girls, making it the first to be honoured from India.

लंदन, 25 अक्टूबर (PTI) मुंबई मुख्यालय वाली एजुकेट गर्ल्स को हाल ही में 2025 रेमन मैग्सेसे पुरस्कार के विजेता के रूप में नामित किया गया है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय गैर-लाभकारी संगठन (NGO) को यह सम्मान मिला है। इसकी संस्थापक सफीना हुसैन का मानना है कि यह इस बात का प्रमाण है कि लड़कियों की शिक्षा कोई क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक प्राथमिकता है।

2007 में गरीबी और अशिक्षा के चक्र को तोड़ने के उद्देश्य से NGO की स्थापना करने वाली हुसैन ने कहा कि एशिया के इस प्रमुख सम्मान से यह प्रदर्शित होता है कि जब समुदाय, नागरिक समाज और सरकारें साथ मिलकर काम करती हैं तो लोग-शक्ति आधारित प्रयास अंतिम स्तर की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि है। हमारे लिए यह पुरस्कार उन हजारों लड़कियों का है जिन्होंने अपने सपनों को छोड़ने से इंकार किया। उन परिवारों का, जिन्होंने बेटियों को स्कूल में बनाए रखा। हर स्वयंसेवक का जिसने हर दरवाजा खटखटाया। हर राज्य सरकार का जिसने हमारा साथ दिया। हर दानदाता का जिसने हम पर भरोसा किया। यह दुनिया को बताता है कि लड़कियों की शिक्षा स्थानीय नहीं बल्कि वैश्विक प्राथमिकता है।

67वें रेमन मैग्सेसे पुरस्कारों का समारोह 7 नवंबर को फिलीपींस की राजधानी मनीला में होगा, जहां एजुकेट गर्ल्स को “कन्या शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक रूढ़ियों को चुनौती देने, लड़कियों और युवा महिलाओं को निरक्षरता से मुक्त कर उन्हें साहस, कौशल और आत्मनिर्णय की शक्ति देने” के लिए प्रशंसा दी जाएगी।

इस NGO का नाम सत्यजीत रे, दलाई लामा और मदर टेरेसा जैसे पूर्व पुरस्कार विजेताओं के साथ जुड़ जाएगा।

हुसैन ने कहा कि अगले 10 वर्षों में उनकी इच्छा है कि हर लड़की माध्यमिक शिक्षा पूरी करे, शिक्षा अपवाद नहीं बल्कि सामान्य बन जाए और लैंगिक असमानता सिर्फ इतिहास की बात रह जाए।

उन्होंने कहा कि अभी भी दुनियाभर में करीब 12.2 करोड़ लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। NGO की प्रगति पहल के माध्यम से लड़कियां सिर्फ शिक्षा में लौट ही नहीं रहीं बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन भी कर रही हैं।

2005 में राजस्थान के एक गांव की 10 वर्षीय लड़की से मुलाकात ने हुसैन को इस मिशन के लिए प्रेरित किया, जो अपने दिन बकरियां चराते हुए बिताती थी क्योंकि उसके परिवार को लगता था कि उसके लिए स्कूल की आवश्यकता नहीं है।

इसी सामुदायिक दृष्टिकोण ने “टीम बालिका” यानी गाँव के शिक्षित युवाओं की स्वयंसेवी टीम की स्थापना की जो घर-घर जाकर स्कूल से बाहर लड़कियों की पहचान करती है और उनके परिवार का विश्वास बनाती है।

स्कूल लौटने के बाद “ज्ञान का पिटारा” नामक शिक्षण पाठ्यक्रम उनकी बुनियादी पढ़ाई और गणितीय कौशल मजबूत करता है।

NGO के प्रगति कार्यक्रम में लंबे समय से स्कूल छोड़ चुकी किशोरियों को जीवन कौशल, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण दिया जाता है।

30,000 से अधिक गांवों में 55,000 से ज्यादा स्वयंसेवकों के साथ इस अभियान ने 20 लाख से अधिक लड़कियों को शिक्षा से जोड़ा है और 2.4 मिलियन बच्चों की सीखने की क्षमता बेहतर की है तथा 90 प्रतिशत रिटेंशन रेट प्राप्त किया है।

अगले दशक का लक्ष्य 10×10 है: 10 साल में 1 करोड़ छात्रों तक पहुंचना। इसके लिए सबसे वंचित क्षेत्रों तक पहुंचना होगा और किशोरियों के लिए लचीले शिक्षा मार्ग तैयार करने होंगे।

टेक्नोलॉजी और डेटा सहयोग करेंगे पर असल प्रेरक शक्ति समुदाय ही रहेगा, जो मानसिकता को बदलता है, घर-घर जाकर।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार एशिया में निस्वार्थ सेवा और परिवर्तनकारी नेतृत्व को सम्मानित करता है।

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