
बमाको (माली), 27 अक्टूबर (एपी): पश्चिम अफ्रीका का भू-आबद्ध देश माली इस समय जिहादी चरमपंथियों द्वारा लगाई गई ईंधन आयात नाकाबंदी के कारण भारी दबाव में है।
शिक्षा मंत्री अमादू साय सवाने ने रविवार देर शाम घोषणा की कि ईंधन की कमी की वजह से देशभर में स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद रहेंगे, क्योंकि इससे शिक्षकों के लिए काम पर पहुंचना मुश्किल हो गया है, जैसा कि अधिकांश अन्य कर्मचारियों के साथ भी हो रहा है।
माली ईंधन आयात के लिए पड़ोसी सेनेगल और आइवरी कोस्ट पर निर्भर है। ऐसे में यह नाकाबंदी सैन्य सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हुई है।
चरमपंथियों ने सेना के खिलाफ दबाव बढ़ाने के लिए यह प्रतिबंध लगाया है। माली, जिसकी आबादी 2.5 करोड़ है, कई दशकों से जिहादी समूहों से संघर्ष कर रहा है, साथ ही उसके पड़ोसी बुर्किना फासो और नाइजर भी इसी संकट से जूझ रहे हैं।
अल-कायदा समर्थित जमाअत नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन (JNIM) समूह ने सितंबर की शुरुआत में पड़ोसी देशों से माली में ईंधन आयात पर प्रतिबंध की घोषणा की। इससे पहले माली सरकार ने इस साल की शुरुआत में चरमपंथियों के ठिकानों पर दबाव बनाने के लिए दूरदराज के इलाकों में ईंधन आपूर्ति कम करने की बात कही थी।
नाकाबंदी ने माली की कमजोर अर्थव्यवस्था को बुरी तरह जकड़ दिया है और सैकड़ों ईंधन वाहनों को सीमाओं पर रोक दिया है।
चरमपंथियों का शक्ति प्रदर्शन
JNIM साहेल क्षेत्र का सबसे शक्तिशाली उग्रवादी संगठन माना जाता है। साहेल उत्तरी अफ्रीका से पश्चिम अफ्रीका तक फैले विशाल अर्ध-शुष्क इलाके को कहा जाता है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि सैन्य हमलों के बावजूद चरमपंथी इस नाकाबंदी को अपनी शक्ति दिखाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
आतंकियों ने प्रमुख मार्गों पर परिवहन कंपनियों को निशाना बनाया है, जिससे कई ने ईंधन ढुलाई बंद कर दी है।
कंट्रोल रिस्क्स ग्रुप की विश्लेषक बेवर्ली ओचिएंग के अनुसार, चरमपंथी व्यावसायिक ऑपरेटरों और आम लोगों को सैन्य सरकार से दूरी बनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे माली की सैन्य सरकार की वैधता और अधिकार को कमजोर किया जा सके।
सैन्य जुंटा की सुरक्षा संकट से जूझने में नाकामी
माली में सैन्य तख्तापलट 2020 में हुआ था, यह कहते हुए कि लंबे समय से चले आ रहे सुरक्षा संकट को समाप्त करना जरूरी है।
इसके बाद नाइजर और बुर्किना फासो में भी तख्तापलट हुए और तीनों देशों ने फ्रांसीसी सेना को बाहर कर रूस के निजी सैन्य समूहों से मदद लेनी शुरू की। हालांकि, रूस के समर्थन और तीनों देशों के सुरक्षा सहयोग के बावजूद, संघर्ष संबंधित आंकड़े बताते हैं कि हालात और बिगड़े हैं।
इस साल माली में हुए कई हमले पिछले तीन वर्षों में सबसे घातक रहे हैं। यूएस-आधारित ACLED प्रोजेक्ट के मूल्यांकन के अनुसार, कई हमलों में सुरक्षा बलों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है।
JNIM इन तीनों साहेल देशों की सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश में है, रिपोर्ट में बताया गया है।
नाकाबंदी से बढ़ी मुश्किलें
अफ्रीका के शीर्ष स्वर्ण उत्पादकों में शामिल होने के बावजूद, माली विश्व के छठे सबसे कम विकसित देशों में से एक है, जहां लगभग आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है।
ईंधन नाकाबंदी से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं और लाखों लोगों की जिंदगी और कठिन हो गई है।
राजधानी बमाको में पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी लाइनें लग गई हैं और कई लोग रातभर इंतजार कर रहे हैं।
सेना ने ईंधन ट्रकों को सीमावर्ती इलाकों से बमाको तक लाने की कोशिश की है और JNIM के ठिकानों पर हवाई हमले भी किए हैं। कुछ ट्रक राजधानी तक पहुंच भी गए हैं, जबकि कुछ को चरमपंथियों ने निशाना बनाया है।
सुरक्षा अध्ययन संस्थान के ओलूवोले ओजेवाले के अनुसार, माली की सेना सीमित हवाई क्षमता के कारण भी बाधित है। (एपी) एसकेएस एसकेएस
