
भारत ने म्यांमार की मानवाधिकार स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के एक रिपोर्ट में लगाए गए “एकतरफ़ा और पक्षपातपूर्ण” आरोपों की कड़ी आलोचना की है। भारत ने कहा कि पड़ोसी देश में हिंसा रोकने और सभी हितधारकों के बीच समावेशी राजनीतिक संवाद की ज़रूरत है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तृतीय समिति में मंगलवार को भारत का पक्ष रखते हुए लोकसभा सांसद दिलीप सैकिया ने कहा कि भारत म्यांमार में शांति, स्थिरता और लोकतंत्र के लिए “म्यांमार-नेतृत्व वाले और म्यांमार के स्वामित्व वाले” प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा।
उन्होंने कहा,
“हम हिंसा रोकने, राजनीतिक क़ैदियों की रिहाई, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति और समावेशी राजनीतिक संवाद की अपनी निरंतर माँग दोहराते हैं।”
सैकिया ने UN के स्पेशल रैपोर्टर द्वारा म्यांमार रिपोर्ट में भारत के खिलाफ की गई टिप्पणियों को झूठा और पक्षपाती बताते हुए कहा कि अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को म्यांमार से आए विस्थापित लोगों से जोड़ना तथ्यों पर आधारित नहीं है।
उन्होंने कहा,
“भारत ऐसे संकीर्ण और पक्षपाती विश्लेषण को पूरी तरह खारिज करता है।”
भारत ने चेताया कि म्यांमार में बिगड़ते हालात का भारत की सीमा सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।
सैकिया ने कहा कि कुछ विस्थापित लोगों में कट्टरपंथ बढ़ने के संकेत मिले हैं, जिससे क़ानून-व्यवस्था पर दबाव पड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को 200 मिलियन से अधिक मुसलमानों का घर बताया, जो सभी धर्मों के साथ मिलकर सद्भाव में रहते हैं — इसलिए भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाना गलत है।
भारत ने प्राकृतिक आपदाओं में त्वरित सहायता के उदाहरण देते हुए बताया कि ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत मार्च 2025 के भूकंप में राहत सामग्री और चिकित्सकीय सहायता भेजी गई। इससे पहले ऑपरेशन सहायता और अन्य मानवीय प्रयास भी किए गए।
सैकिया ने कहा कि भारत शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ASEAN देशों और संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रयासों का भी समर्थन करता है।
भारत ने 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए दो बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे हैं, जिनके सदस्य विभिन्न राजनीतिक दलों से हैं।
PTI SCY SCY
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