लैंसेट रिपोर्ट: भारत में 2022 में PM2.5 प्रदूषण से लगभग 17 लाख मौतें, कोयला व परिवहन ईंधन से 44%

The Lancet Countdown on Health and Climate Change

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (PTI) द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में मानव-जनित PM2.5 प्रदूषण के कारण 17 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। वर्ष 2010 की तुलना में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फॉसिल फ्यूल (कोयला और परिवहन ईंधन) से हुई मौतें इनका 44 प्रतिशत हिस्सा हैं।

‘2025 रिपोर्ट ऑफ द लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज’ के अनुसार, सड़क परिवहन में पेट्रोल के उपयोग से 2.69 लाख मौतें दर्ज की गईं।

रिपोर्ट का अनुमान है कि बाहरी वायु प्रदूषण के कारण समय से पहले होने वाली मौतों से भारत को 339.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (GDP का लगभग 9.5%) का आर्थिक नुकसान हुआ।

इस रिपोर्ट को यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के नेतृत्व में 71 शैक्षणिक संस्थानों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के 128 विशेषज्ञों ने तैयार किया है।

COP30 से पहले प्रकाशित यह रिपोर्ट, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के बीच संबंधों का अब तक का सबसे व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष ऐसे समय में आए हैं जब दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार खराब और “बहुत खराब” श्रेणी में बनी हुई है। प्रदूषण कम करने के लिए हाल में क्लाउड सीडिंग की गई, लेकिन विशेषज्ञ इसे अल्पकालिक उपाय बताते हैं जो मूल कारणों पर प्रभाव नहीं डालता।

रिपोर्ट में कहा गया:

“भारत में 2022 में 17,18,000 मौतें मानव-जनित PM2.5 प्रदूषण के कारण हुईं। इनमें से 7,52,000 मौतें (44 प्रतिशत) कोयला और तरल गैस जैसे फॉसिल फ्यूल के कारण हुईं।”

रिपोर्ट के अनुसार,

• सड़क परिवहन के लिए 96 प्रतिशत ऊर्जा अभी भी फॉसिल फ्यूल से आती है

• सिर्फ 0.3 प्रतिशत ऊर्जा बिजली से

• कोयला कुल ऊर्जा आपूर्ति का 46 प्रतिशत और बिजली उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा

• नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा मात्र 2 और 10 प्रतिशत

विशेषज्ञों ने कहा कि फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता और जलवायु परिवर्तन के अनुसार समायोजन में देरी लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और रोज़गार पर भारी पड़ रही है।

2020-2024 के दौरान भारत में हर साल औसतन 10,200 मौतें जंगलों में आग से उत्पन्न PM2.5 प्रदूषण के कारण हुईं — जो 2003-2012 की तुलना में 28% अधिक है।

2022 में घर की 18% ऊर्जा बिजली से और 58% ऊर्जा ठोस बायोफ्यूल से प्राप्त हुई, जो अत्यधिक प्रदूषणकारी हैं।

घर के अंदर वायु प्रदूषण के कारण प्रति 1 लाख आबादी पर 113 मौतें दर्ज की गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर शहरी इलाकों से अधिक पाई गई।

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श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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