
रामनाथपुरम (तमिलनाडु), 30 अक्टूबर (PTI) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने गुरुवार को इस जिले के पासुम्पोन स्थित स्मारक पर स्वतंत्रता सेनानी मुत्तुरामालिंगा थेवर को उनकी 63वीं गुरु पूजा और 118वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
एक्स पर पोस्ट करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस स्वतंत्रता सेनानी को “महान योद्धा” बताया। उन्होंने कहा कि पासुम्पोन मुत्तुरामालिंगा थेवर सच्चे देशभक्त थे जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र और जनता की सेवा में समर्पित किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नजदीकी सहयोगी के रूप में उन्होंने साहस, त्याग और देशभक्ति का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि थेवर ने राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता को जीवन की दो मुख्य राहें माना। वे सभी समुदायों और धर्मों के नेता थे, जिन्होंने दूसरों के कल्याण के लिए अपनी भूमि तक दान कर दी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि थेवर एक प्रखर वक्ता और गंभीर पाठक थे जिन्होंने अपने विचारों और कार्यों से लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने ब्रिटिश अत्याचारों का विरोध किया, देश के लिए कारावास झेला और हर चुनाव में जीत हासिल की, जिससे जनता का उन पर मजबूत विश्वास दिखता है। उन्होंने कहा कि थेवर की पूजा करना समाज और राजनीति में अनुशासन, कर्तव्य और धर्म के प्रति सम्मान की भावना दर्शाता है और उनका जीवन भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों से वह पासुम्पोन मुत्तुरामालिंगा थेवर जयंती कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं और उपराष्ट्रपति के रूप में भी अपनी पहली तमिलनाडु यात्रा के दौरान इसमें शामिल होकर प्रसन्न हैं।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी पासुम्पोन स्मारक पर थेवर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि थेवर ने दमनकारी कानूनों से जनता को मुक्त कराया और नेताजी के विश्वासपात्र साथी के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि पासुम्पोन में एक भव्य विवाह मंडप बनाने की घोषणा की गई है।
विपक्ष के नेता एडप्पाडी के पलानीस्वामी और कई राजनीतिक दलों के नेता भी थेवर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को मदुरै में 3,000 और पासुम्पोन में 8,000 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किया गया है।
दक्षिण तमिलनाडु में अत्यधिक सम्मानित नेता थेवर का जन्म 30 अक्टूबर 1908 को हुआ था और 30 अक्टूबर 1963 को उनका निधन हुआ। इसलिए उनकी जयंती और गुरु पूजा एक ही दिन मनाई जाती है। PTI JR SA
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