हमने अब बाधा तोड़ दी है, जीतना अब आदत बनना चाहिए: हरमनप्रीत कौर

Navi Mumbai: India’s captain Harmanpreet Kaur, center, with her relatives after winning the ICC Women's World Cup 2025, at the DY Patil Stadium, in Navi Mumbai, early Monday, Nov. 3, 2025. (PTI Photo/Kunal Patil) (PTI11_03_2025_000090B)

नवी मुंबई, 3 नवम्बर (PTI) आधी रात के ठीक पहले, हरमनप्रीत कौर ने अपना खुद का इतिहास रच दिया, एक “बाधा” को तोड़ा और जोशीली, जज़्बे से भरी अपनी टीम के साथ यह ऐलान कर दिया कि यह अंत नहीं, बल्कि बस शुरुआत है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रविवार को यहां दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर अपना पहला विश्व कप जीत लिया और भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिख दिया।

विश्व कप जीतने वाला निर्णायक कैच लेने के बाद भारतीय कप्तान ने भावनाओं का ऐसा सैलाब दिखाया, जो पहले कभी देखने को नहीं मिला था।

वह पागलों की तरह दौड़ीं मानो कल हो ही न। युवा खिलाड़ियों के जश्न के बीच थोड़ी देर ठिठककर इस पल को महसूस करती रहीं।

“गुरुजी” अमोल मजूमदार के पैर छुए और भावनाओं से भरी झप्पी में आंखों से आंसू छलक पड़े।

उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट की दो दिग्गजों—मिताली राज और झूलन गोस्वामी—को ट्रॉफी थमाई। दोनों दिग्गज भावुक होकर रो पड़ीं।

एक ऐसा पल था जिसे हमेशा के लिए संजोया जाए—जब कप्तान हरमन और उपकप्तान स्मृति मंधाना ने झूलन को गले लगाते हुए कहा—

“दीदी, ये आपके लिए था।”

पोस्ट-मैच प्रस्तुति में हरमनप्रीत ने यह नहीं भुलाया कि इस अद्भुत उपलब्धि का व्यापक महत्व क्या है।

उन्होंने कहा—

“यह शुरुआत है। हम इस बाधा को तोड़ना चाहते थे। और अब हमारी अगली योजना है कि इसे अपनी आदत बनाएं। हम इस पल का इंतज़ार कर रहे थे। अब बड़े अवसर आएंगे और हम लगातार बेहतर होना चाहते हैं। यह अंत नहीं, बस शुरुआत है।”

जैसे कप्तानी सिर्फ योजना नहीं, बल्कि साहसिक फैसलों का खेल है—ठीक जैसे 1983 में कपिल देव ने विवियन रिचर्ड्स को रोकने के लिए मदन लाल को एक और ओवर सौंपा था, हरमनप्रीत ने भी अपनी “गट फीलिंग” पर भरोसा किया।

और उनकी ट्रम्प कार्ड थीं शैफाली वर्मा—जिन्होंने मैदान पर लगभग हर काम कमाल किया।

हरमन ने कहा—

“जब लौरा और सून बल्लेबाज़ी कर रही थीं, वे सेट दिख रही थीं। तभी मैंने शैफाली को देखा और जिस आत्मविश्वास के साथ वह खेल रही थीं, मुझे लगा आज हमारा दिन है। दिल कह रहा था कि उसे एक ओवर और देना चाहिए। वही हमारे लिए टर्निंग पॉइंट था।”

शैफाली ने अपने अंतरराष्ट्रीय ODI करियर में अब तक कुल 14 ओवर ही फेंके थे, लेकिन इस बड़े मंच पर दो अहम विकेट निकाल दिए।

हरमन ने कहा—

“जब वह टीम में आईं, हमने उनसे कहा था कि हमें 2-3 ओवर की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने कहा—अगर जरूरत हो तो मैं 10 ओवर भी डाल दूंगी। उनका जज़्बा काबिल-ए-तारीफ है। सलाम।”

हरमनप्रीत ने कोच अमोल मजूमदार और सपोर्ट स्टाफ का भी आभार व्यक्त किया—

“अमोल सर हमेशा कहते थे कि कुछ बड़ा और खास करना है। तैयारी जारी रखनी है।

BCCI और सपोर्ट स्टाफ ने हम पर भरोसा किया, टीम में ज्यादा बदलाव नहीं किए। इसी विश्वास की वजह से आज हम यहां खड़े हैं।”

पिछले एक साल में अपने करियर की चुनौतियों से लड़ने वाली शैफाली भावुक हो उठीं—

“मैंने शुरुआत में कहा था, भगवान ने मुझे कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है, और वही आज साबित हुआ। बहुत खुश हूं, इसे शब्दों में नहीं कह सकती।”

दो नॉकआउट मैचों में लगातार शानदार प्रदर्शन आसान नहीं था—

“मुश्किल था, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था। बस शांत रहना था और सब संभव था।

मेरे परिवार—माता-पिता, दोस्तों और भाई—ने हमेशा मेरा साथ दिया।

मैं बस टीम को जिताना चाहती थी और मेरा दिमाग पूरी तरह साफ था।”

और जब स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर मौजूद हों—तो उससे बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है!

“सचिन सर को देखकर गजब का उत्साह आया। मैं उनसे बात करती रहती हूं, वह आत्मविश्वास देते हैं। वह क्रिकेट के भगवान हैं—और उन्हें सामने देखकर ही इंस्पिरेशन मिलती है।”

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