‘सिलिकॉन वैली से सूरत तक’: कांग्रेस बोली — HIRE बिल से भारत में रोज़गार को मिलेगी नई रफ़्तार

नई दिल्ली, 4 नवम्बर (PTI) कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि यदि अमेरिका की सीनेट में पेश किया गया वह विधेयक, जिसमें आउटसोर्सिंग भुगतान पर 25 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव है, हक़ीक़त बनता है तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था में “तेज़ी की आग” लगा देगा।

विपक्षी पार्टी ने कहा कि यह विधेयक अमेरिका में बढ़ती सोच को दर्शाता है जिसमें माना जा रहा है कि जहाँ ब्लू-कॉलर नौकरियाँ चीन के पास चली गईं, वहीं व्हाइट-कॉलर नौकरियाँ भारत को “नहीं जानी चाहिए”। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने यह बात 6 अक्टूबर को ओहायो के सीनेटर बर्नी मोरेनो द्वारा पेश किए गए Halting International Relocation of Employment Act (HIRE Act Bill) का हवाला देते हुए कही।

उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए बताया कि यह बिल सीनेट की वित्त समिति के पास भेजा गया है।

इस विधेयक में प्रस्ताव है कि किसी भी अमेरिकी व्यक्ति द्वारा किए गए आउटसोर्सिंग भुगतान पर 25 प्रतिशत कर लगाया जाए। इस भुगतान को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि, “ऐसा कोई भी धन, जो किसी अमेरिकी कंपनी या करदाता द्वारा किसी विदेशी व्यक्ति को दिया जाए, जिसका कार्य अमेरिकी उपभोक्ताओं को लाभ पहुँचाता हो।”

रमेश ने कहा कि इस बिल का भारत के आईटी सर्विसेज, BPO, कंसल्टिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) सेक्टर पर सीधा और बड़ा प्रभाव पड़ेगा।

आयरलैंड, इस्राइल और फिलीपींस जैसे देश भी प्रभावित होंगे, लेकिन सबसे बड़ा असर भारत की सेवा निर्यात उद्योग पर होगा, जो पिछले 25 वर्षों में भारत की सबसे बड़ी सफलता की कहानी रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान रूप में यह बिल पारित होगा या नहीं, यह साफ नहीं है — यह बदला भी जा सकता है या टल भी सकता है।

लेकिन इतना तय है कि यह बिल अमेरिका में विकसित हो रहे उस विचार को दिखाता है जिसमें माना जा रहा है कि ब्लू-कॉलर नौकरियाँ चीन को चली गईं, लेकिन व्हाइट-कॉलर नौकरियाँ भारत के पास न जाएँ।

रमेश ने कहा, “एक साल पहले किसी ने नहीं सोचा था कि भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को इतने झटके लगेंगे — HIRE बिल उसी का एक और उदाहरण है।”

उन्होंने दावा किया कि यदि यह बिल कभी वास्तविकता बन गया, तो भारत की अर्थव्यवस्था को अमेरिका के नए सामान्य संबंधों के अनुसार खुद को ढालना होगा।

यह प्रस्तावित HIRE अधिनियम आउटसोर्सिंग को रोकने और घरेलू रोज़गार बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों द्वारा विदेशी कर्मियों को दी जाने वाली सेवाओं के भुगतान पर 25 प्रतिशत कर लगाया जाएगा।

रमेश ने बिल की जानकारी वाला लिंक भी साझा किया।

PTI

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