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KGF actor Harish Rai {Photo: X}

कन्नड़ फिल्म उद्योग दिग्गज अभिनेता हरीश राय के दुखद निधन से सदमे में है। 6 नवंबर 2025 को 55 वर्ष की आयु में कैंसर से जूझते हुए उनका निधन हो गया। राय, जिन्हें ब्लॉकबस्टर केजीएफ फ्रेंचाइज़ी में रॉकी भाई के प्रिय ‘चाचा’ ख़ासिम की अविस्मरणीय भूमिका के लिए जाना जाता है, ने बेंगलुरु के किडवाई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी में अंतिम सांस ली। वे पिछले एक साल से स्टेज 4 थायरॉइड कैंसर से लड़ रहे थे, जो पेट तक फैल गया था। उनके निधन की पुष्टि परिवार और सहकर्मियों ने की, जिससे सैंडलवुड में गहरा शोक फैल गया, जहाँ वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा, भावनात्मक गहराई और दमदार खलनायकी के लिए जाने जाते थे। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार सहित फिल्म जगत तथा प्रशंसकों ने श्रद्धांजलियाँ अर्पित कीं, और दशकों तक फैले उनके गौरवशाली करियर को याद किया।

अंतिम लड़ाई: कैंसर का मौन संकट

राय की थायरॉइड कैंसर से जंग 2022 में शुरू हुई थी, जिसे उन्होंने साहस और खुलकर साझा किए अनुभवों के साथ लड़ा। स्टेज 4 में पहुँच चुके इस रोग ने उनके शरीर को कमजोर कर दिया था, फिर भी वे उपचार के खर्च और दर्द के बारे में बेझिझक बोलते रहे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि इलाज के दौरान एक इंजेक्शन की कीमत 3.55 लाख रुपये थी, 63 दिनों में इलाज के चक्र 10.5 लाख तक पहुँच जाते थे और पूरा उपचार लगभग 70 लाख तक का था। उन्होंने कहा था, “सूजन छिपाने के लिए मैंने फिल्मों में दाढ़ी बढ़ाई,” दर्द को पर्दे के पीछे छिपाते हुए। केजीएफ को-स्टार यश के समर्थन की खबरें आईं, जिन्हें उन्होंने अपना “भाई” कहा, लेकिन उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा था, “यश ने पहले मदद की है… वह एक कॉल की दूरी पर है, लेकिन एक व्यक्ति कितना कर सकता है?” किडवाई अस्पताल में उनका जाना एक योद्धा की लड़ाई का मार्मिक अंत है, जो उद्योग में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता को उजागर करता है।

करियर की करिश्माई यात्रा: ‘डॉन राय’ से रॉकी के ‘चाचा’ तक

1970 में जन्मे हरीश राय का कन्नड़ सिनेमा में सफर पुनर्निर्माण की मिसाल था। 1990 के दशक में डेब्यू के बाद वे शीघ्र ही एक दमदार खलनायक के रूप में प्रसिद्ध हुए। 1995 की कल्ट फिल्म ‘ओम’ में ‘डॉन राय’ की भूमिका ने उन्हें अपार लोकप्रियता दी और उनकी दहाड़ती स्क्रीन उपस्थिति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। 50 से अधिक फिल्मों में उन्होंने एक्शन, ड्रामा और कॉमेडी का संतुलन बखूबी निभाया: समरा (2007), बैंगलोर अंडरवर्ल्ड (2008), जोडिहक्की (2010), राज बहादुर (2016), संजू वेड्स गीता (2011), स्वयंवरा (2010), नल्ला (2005), और हेलो यम (2013)। फिर केजीएफ: चैप्टर 1 (2018) और चैप्टर 2 (2022) में ख़ासिम के रूप में उनके संवेदनशील अभिनय ने उन्हें पैन-इंडिया पहचान दिलाई। यश ने एक बार कहा था, “चाचा की आँखें ही कहानी कह देती थीं,” जो फिल्म की 1200 करोड़ रुपये की सफलता में उनकी अहम भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने तमिल और तेलुगु फिल्मों में भी कार्य किया, पर उनका दिल सदा सैंडलवुड में रहा।

श्रद्धांजलियाँ और उद्योग का शोक: सैंडलवुड के दिल में खालीपन

राय के निधन की खबर फैलते ही पूरे उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने एक्स पर लिखा: “कन्नड़ सिनेमा के प्रसिद्ध खलनायक अभिनेता हरीश राय का निधन अत्यंत दुःखद है। फिल्म उद्योग ने एक अनमोल कलाकार को खो दिया है… ओम, हेलो यम, केजीएफ और केजीएफ 2 जैसी फिल्मों में उनका अभिनय शानदार रहा और सभी का ध्यान आकर्षित किया। ओम शांति।” शिवा राजकुमार ने उन्हें “लड़ाई का साथी” बताया, जबकि निर्देशक उपेंद्र ने ट्वीट किया: “हरीश, तुम्हारी दहाड़ हमेशा गूंजेगी।” यश, जिनकी उनसे गहरी दोस्ती थी, उनके उपचार में मदद करने की खबरों के साथ, शोक में डूबे हुए हैं। प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उनके प्रतिष्ठित दृश्यों को साझा करते हुए लिखा: “डॉन राय की दहशत से लेकर चाचा की ममता तक—हरीश राय सैंडलवुड के अनसुने राजा थे।” 7 नवंबर को बेंगलुरु में उनका अंतिम संस्कार आयोजित होगा।

अमर विरासत: शक्ति और संवेदनशीलता की मिसाल

हरीश राय का जाना किसी अंत का संकेत नहीं—यह एक उत्कर्ष है। सैंडलवुड उनके अभिनय को सलाम करता है और यह संदेश देता है: क्या एक व्यक्ति की दहाड़ दिलों को पिघला सकती है? उनकी निडरता हमेशा हाँ कहेगी, और सिनेमा के इतिहास में वे सदा अमर रहेंगे।

  1. मनोज एच