
नई दिल्ली, 9 नवम्बर (पीटीआई) — त्रि-सेवा अभ्यास त्रिशूल मिशन-केन्द्रित प्रमाणीकरणों के साथ आरंभ हुआ है, जिसका उद्देश्य अनेक क्षेत्रों में एकीकृत तत्परता को सुदृढ़ करना है, रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा।
इस अभ्यास में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर, ड्रोन और प्रतिरोधक-ड्रोन अभियान, खुफिया, निगरानी और टोही के साथ-साथ वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग शामिल हैं।
वक्तव्य में कहा गया कि यह अभ्यास स्थलीय, समुद्री और वायु क्षेत्रों में एकीकृत समन्वित कार्रवाई के माध्यम से आभासी और भौतिक दोनों क्षेत्रों में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए त्रि-सेवाओं की तैयारी को दोहराता है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, त्रिशूल अभ्यास आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं के विस्तार को दर्शाता है।
थार मरुस्थल में, दक्षिणी कमान के गठन ‘मरुज्वाला’ और ‘अखंड प्रहार’ अभ्यासों के माध्यम से गहन संयुक्त अभियानों, गतिशीलता और संयुक्त अग्नि एकीकरण का सत्यापन कर रहे हैं।
प्रशिक्षण का समापन एक विशाल युद्धाभ्यास में होगा, जिसमें सटीक लक्ष्यभेदन और बहु-क्षेत्रीय समन्वय का सत्यापन किया जाएगा।
कच्छ क्षेत्र में, सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक बल और सीमा सुरक्षा बल नागरिक प्रशासन के साथ करीबी तालमेल में एकीकृत परिचालन क्षमता का अभ्यास कर रहे हैं।
अंतिम चरण में सौराष्ट्र तट पर एक संयुक्त उभयचर अभ्यास होगा, जिसमें दक्षिणी कमान की उभयचर सेनाएँ तटीय लैंडिंग ऑपरेशन करेंगी।
यह पूर्ण-क्षेत्रीय भूमि-समुद्र-वायु एकीकरण का सत्यापन करेगा और सशस्त्र बलों की शक्ति और समन्वय क्षमता को प्रदर्शित करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि यह अभ्यास भारतीय सेना की ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ पहल के लिए भी एक परीक्षण मंच के रूप में कार्य करता है।
भारतीय सेना ने कहा कि वह निरंतर विकसित होने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम एक फ्यूचर-रेडी फोर्स बनने के अपने संकल्प को दोहराती है।
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