ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च अदालत ने रूस की दूतावास बेदखली को लेकर दायर याचिका खारिज की

मेलबर्न, 12 नवंबर (एपी) — ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को रूस की उस कानूनी चुनौती को खारिज कर दिया जिसमें उसने सुरक्षा कारणों से राजधानी कैनबरा में नई दूतावास इमारत के लिए पट्टा (लीज़) रद्द किए जाने के फैसले का विरोध किया था। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार रूस को मुआवजा दे और उसकी आधी कानूनी लागत का भुगतान करे।

सात न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में पट्टा रद्द करने का अधिकार था, लेकिन साथ ही उसे रूस को उचित मुआवजा देना होगा।

ऑस्ट्रेलिया की अटॉर्नी-जनरल मिशेल रोलैंड ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “ऑस्ट्रेलिया हमेशा अपने मूल्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करेगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि सरकार का कदम कानूनी रूप से सही था।” उन्होंने कहा कि सरकार अदालत के निर्णय के आलोक में मुआवजे के अगले कदमों पर विचार करेगी।

रूसी दूतावास ने इस पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की।

दरअसल, 2008 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने संसद भवन से मात्र 300 मीटर की दूरी पर रूस को नई दूतावास बनाने के लिए जमीन का पट्टा दिया था। हालांकि रूस अब भी ग्रिफ़िथ इलाके में सोवियत कालीन अपने पुराने दूतावास का उपयोग कर रहा है।

2023 में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा था कि सरकार को खुफिया एजेंसियों से यह स्पष्ट सलाह मिली थी कि संसद भवन के इतने करीब रूस की नई मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। उसी दिन संसद ने आपात कानून पारित कर रूस का पट्टा रद्द कर दिया था।

यह कदम तब उठाया गया जब रूस ने स्थानीय प्रशासन द्वारा दी गई बेदखली के आदेश के खिलाफ संघीय अदालत में अपील जीत ली थी। उस समय भूमि पर केवल एक छोटा कॉन्सुलर भवन ही निर्मित था।

रूस ने ऑस्ट्रेलिया के इस कदम को “रूस विरोधी उन्माद” करार दिया था।

रूसी वकीलों का तर्क था कि पट्टा रद्द करने वाला कानून असंवैधानिक है क्योंकि किसी वास्तविक सुरक्षा खतरे के सबूत नहीं दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि पट्टा बहाल नहीं किया जाता, तो रूस को मुआवजा मिलना चाहिए।

ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी ASIO द्वारा दी गई सुरक्षा रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत नहीं की गई क्योंकि वह गोपनीय थी।

रूस के वकील ब्रेट वॉकर ने कहा कि यह “चिंताजनक” है कि किसी की संपत्ति को बिना मुआवजे के छीनने को जायज ठहराया जा रहा है जबकि कोई ठोस सुरक्षा खतरा साबित नहीं हुआ।

वहीं, ऑस्ट्रेलियाई सरकार के वकील स्टीफन डोनाघ्यू ने कहा कि सरकार के पास यह अधिकार है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर पट्टा समाप्त करने का कानून बना सके। उन्होंने यह भी कहा कि किसी देश को उसके खुद के “किए गए कार्यों की समस्याओं” के लिए मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।

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