‘अगले 10 वर्षों में भारत को मकाले मानसिकता से मुक्त करें,’ प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image received on Nov. 17, 2025, Prime Minister Narendra Modi at the sixth Ramnath Goenka Lecture organised by The Indian Express, in New Delhi. (Handout via PTI Photo)(PTI11_17_2025_000445B)

नई दिल्ली, 18 नवम्बर (PTI) — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नागरिकों से आह्वान किया कि वे उस गुलामी की मानसिकता से देश को मुक्त कराने का संकल्प लें, जिसे लगभग 200 वर्ष पहले थॉमस मकाले ने भारत की सांस्कृतिक नींव को कमजोर करने के उद्देश्य से फैलाया था।

छठे रामनाथ गोयनका व्याख्यान को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और शैक्षणिक नींव के विरुद्ध मकाले द्वारा किया गया अपराध वर्ष 2035 में 200 वर्ष पूरा करेगा।

मोदी ने कहा, “मैं पूरे देश से अपील करना चाहता हूं कि आने वाले दशक में हम यह संकल्प लें कि मकाले द्वारा भारत पर थोपे गए गुलामी के मानसिक ढांचे से खुद को मुक्त करेंगे। आने वाले 10 वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई राष्ट्र स्वयं का सम्मान नहीं करता तो वह अपने स्वदेशी तंत्र को भी नकार देता है, जिसमें मेड इन इंडिया विनिर्माण ढांचा भी शामिल है।

पर्यटन का उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा कि हर देश में लोग अपनी ऐतिहासिक विरासत पर गर्व करते हैं, जबकि स्वतंत्रता के बाद भारत में अपनी ही धरोहर को नकारने के प्रयास हुए।

उन्होंने कहा, “विरासत पर गर्व के बिना उसके संरक्षण की प्रेरणा नहीं होती और संरक्षण के अभाव में वह धरोहर ईंट और पत्थर के खंडहरों में बदल जाती है। पर्यटन के विकास के लिए अपनी विरासत पर गर्व करना आवश्यक है।”

स्थानीय भाषाओं के मुद्दे पर मोदी ने सवाल किया कि और कौन सा देश अपनी ही भाषाओं का अनादर करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने अनेक पश्चिमी तौर-तरीके अपनाए, लेकिन अपनी मातृभाषा से कभी समझौता नहीं किया। इसी कारण नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में स्थानीय भाषाओं में शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अंग्रेजी भाषा के विरोध में नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाओं के समर्थन में दृढ़ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मकाले ने भारत के आत्मविश्वास को तोड़ दिया और हीनभावना पैदा की।

उन्होंने कहा, “यही वह समय था जब यह बीज बोया गया कि प्रगति और महानता केवल विदेशी तरीकों से ही हासिल की जा सकती है।” मोदी ने जोड़ा कि स्वतंत्रता के बाद यह मानसिकता और गहरी होती चली गई।

मोदी ने कहा, “भारत की शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक आकांक्षाएं विदेशी मॉडलों से मेल खाने लगीं। स्वदेशी प्रणालियों पर गर्व कम होता गया और महात्मा गांधी द्वारा स्थापित स्वदेशी आधार को लगभग भुला दिया गया। शासन के मॉडल विदेशों में खोजे जाने लगे और नवाचार भी विदेशी धरती पर तलाशा जाने लगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशक में मकाले द्वारा पैदा की गई बुराइयों और सामाजिक विकृतियों का उन्मूलन किया जाना चाहिए।

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