
नई दिल्ली, 21 नवंबर (PTI):
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को कहा कि भारत की महामारी-तैयारी व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है और संयुक्त प्रकोप जांच के साथ-साथ मेडिकल काउंटरमेज़र विकसित किए जा रहे हैं।
नड्डा, जो वन हेल्थ की कार्यकारी संचालन समिति के अध्यक्ष भी हैं, यहां भारत मंडपम कन्वेंशन हॉल में आयोजित नेशनल वन हेल्थ मिशन असेंबली 2025 के उद्घाटन पर वीडियो संदेश दे रहे थे।
कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पॉल, भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अजय के. सूद और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बह्ल भी उपस्थित थे।
दो दिवसीय आयोजन की थीम है —
‘ज्ञान से क्रियान्वयन की ओर – एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक भविष्य’।
“वन अर्थ, वन हेल्थ, वन फ्यूचर” — भविष्य की तैयारी का आधार
नड्डा ने कहा कि यह थीम भारत की समग्र स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती प्रतिबद्धता और वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
उन्होंने कहा,
“यह सिर्फ एक थीम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य की महामारियों के लिए तैयार रहने का आधार है।”
स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार में भारत की बड़ी उपलब्धियाँ
नड्डा ने पिछले दशक में स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया और कहा कि आज भारत फार्मा और मेडिकल साइंस में एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन चुका है।
उन्होंने भारत द्वारा विकसित और निर्मित वैक्सीन —
कोवैक्सिन, कोविशील्ड, कॉर्बेवैक्स और दुनिया का पहला इंट्रानैसल COVID-19 वैक्सीन — को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में गिनाया।
उन्होंने बताया कि भारत ने 100 से अधिक देशों को वैक्सीन आपूर्ति की, जिससे “विश्वसनीय वैश्विक साझेदार” के रूप में भारत की पहचान और मजबूत हुई।
नेक्स्ट-जेनरेशन वैक्सीन प्लेटफॉर्म में तेजी
भारत ने mRNA, DNA, वायरल वेक्टर और बायोसिमिलर जैसी अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों में भी उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे उभरते स्वास्थ्य खतरों के प्रति देश की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ी है।
डायग्नोस्टिक्स में भारत बना इनोवेशन हब
नड्डा ने कहा,
“डायग्नोस्टिक्स क्षेत्र में भारत एक नवाचार केंद्र के रूप में उभरा है।”
उन्होंने विशेष रूप से TrueNat, PathoDetect और CRISPR-आधारित टेस्ट जैसी भारतीय नवाचारों का उल्लेख किया जो तेजी से, सटीक और अधिक सुलभ जांच मुहैया कराते हैं।
उन्होंने INSACOG की जीनोमिक निगरानी में भूमिका और CoWIN प्लेटफ़ॉर्म की वैश्विक स्तरीय डिजिटल हेल्थ क्षमता को भी सराहा।
नेशनल वन हेल्थ मिशन: महामारी तैयारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह मिशन पहली बार 16 केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों/विभागों को साथ लाता है—
मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, फार्मा, रक्षा, पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों से।
नड्डा ने कहा,
“वन हेल्थ मिशन पूरे सरकार और पूरे समाज के सहयोग का अनोखा उदाहरण है।”
सर्विलांस और प्रकोप जांच को दी जा रही है गति
उन्होंने बताया कि मिशन के तहत कई प्रमुख गतिविधियों पर काम शुरू हो चुका है, जिनमें शामिल हैं—
- वधशालाओं, पक्षी अभयारण्यों, जूलॉजिकल पार्क और बड़े शहरों की वेस्टवाटर प्रणालियों में एकीकृत निगरानी,
- एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस और अन्य संक्रामक रोगजनकों की लगातार मॉनिटरिंग।
“संयुक्त प्रकोप जांच और मेडिकल काउंटरमेजर्स का विकास चल रहा है, जिससे भारत की महामारी तैयारी का ढांचा मजबूत होगा।”
देशभर में 23 BSL-3 और BSL-4 लैबों का नेटवर्क
नड्डा ने बताया कि मिशन के अंतर्गत 23 हाई-कॉन्टेनमेंट लैब स्थापित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा,
“ये लैब उभरते या बदलते रोगजनकों के खिलाफ हमारी पहली रक्षा पंक्ति हैं। ये शुरुआती पहचान और तेज़ प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।”
भारत को भविष्य के लिए तैयार बनाएगा वन हेल्थ दृष्टिकोण
नड्डा ने कहा कि यह दृष्टिकोण—
- महामारी और महामारी-जैसी परिस्थितियों के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करेगा
- एकीकृत हस्तक्षेपों को समर्थन देगा
- भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए भारत को तैयार रखेगा
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