
नई दिल्ली, 2 दिसंबर (PTI) सरकार ने मंगलवार को संसद को सूचित किया कि देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 है।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने बताया कि देश में 13,88,185 पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर और 7,51,768 पंजीकृत आयुष चिकित्सा प्रणाली के प्रैक्टिशनर हैं।
उन्होंने कहा, “यदि एलोपैथिक और आयुष दोनों ही प्रणालियों में पंजीकृत 80 प्रतिशत प्रैक्टिशनर उपलब्ध माने जाएँ, तो देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 अनुमानित है।”
नड्डा ने सदन को यह भी बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों, स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) सीटों की संख्या में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई है।
मंत्री के अनुसार, 2014 से मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818, UG सीटें 51,348 से बढ़कर 1,28,875 और PG सीटें 31,185 से बढ़कर 82,059 हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने वंचित, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
केंद्र प्रायोजित योजना “मौजूदा जिला/रेफरल अस्पताल से जुड़े नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना” के तहत स्वीकृत 157 में से 137 नए मेडिकल कॉलेज कार्यात्मक हो चुके हैं, नड्डा ने कहा।
MBBS पाठ्यक्रम में परिवार गोद लेने का कार्यक्रम (FAP) शामिल किया गया है, ताकि ग्रामीण आबादी को समान स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। इस कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज गाँवों को गोद लेते हैं और MBBS छात्र इन गाँवों में परिवारों को गोद लेते हैं।
नड्डा ने कहा कि इससे टीकाकरण, वृद्धि निगरानी, मासिक धर्म स्वच्छता, आयरन-फोलिक एसिड पूरकता, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, वेक्टर नियंत्रण और दवा पालन जैसे क्षेत्रों में परिवारों के नियमित फॉलो-अप में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि यह परिवारों को विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में शिक्षित करने में भी सहायता करता है।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के जिला रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत मेडिकल कॉलेजों के दूसरे और तीसरे वर्ष के PG छात्रों को जिला अस्पतालों में नियुक्त किया जाता है।
इसके अलावा, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों को कठिन-क्षेत्र भत्ता एवं आवास सुविधाएँ भी दी जाती हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्यों को विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए बातचीत योग्य वेतन देने की अनुमति है, जिसमें “यू कोट वी पे” जैसी लचीली रणनीतियाँ शामिल हैं, नड्डा ने बताया।
उन्होंने कहा कि NMC द्वारा बनाए गए चिकित्सा प्रैक्टिशनरों के पंजीकरण और चिकित्सकीय अभ्यास के लाइसेंस संबंधी विनियम विदेशी चिकित्सा प्रैक्टिशनरों के अस्थायी पंजीकरण से जुड़े हैं, जिनके तहत विदेशी-योग्य और विदेशी-पंजीकृत गैर-भारतीय डॉक्टरों को प्रशिक्षण, फेलोशिप, शोध, विज़िट, स्वैच्छिक सेवा या स्वीकृत PG/सुपर-स्पेशलिटी कोर्स जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए भारत में चिकित्सा अभ्यास की अनुमति मिलती है।
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