कुशल प्रवासन पर रोक लगाने वाले देश होंगे ‘शुद्ध हानि में’: जयशंकर

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Dec. 3, 2025, External Affairs Minister S Jaishankar addresses a gathering during the inauguration of 'India’s World' annual conclave 2025 on the ‘The Mobility Imperative’. (@DrSJaishankar/X via PTI Photo)(PTI12_03_2025_000315B)

नई दिल्ली, 3 दिसंबर (पीटीआई)विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि वे देश जो सीमाओं के पार पेशेवरों के आवागमन में अत्यधिक बाधाएँ पैदा कर रहे हैं, वे भविष्य में “शुद्ध हानि” वाले साबित होंगे। उन्होंने कहा कि भारत को अन्य देशों को यह समझाना होगा कि प्रतिभा का वैश्विक उपयोग “पारस्परिक लाभ” के लिए होता है।

मोबिलिटी पर एक सम्मेलन में हुए संवाद सत्र के दौरान जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने एच-1बी वीज़ा पर नई शुल्क व्यवस्था लागू की है, जो ट्रम्प प्रशासन की कड़ी आव्रजन नीति के अनुरूप है।

उन्होंने कहा, “अगर वे प्रतिभा के प्रवाह पर बहुत अधिक अंकुश लगाते हैं, तो वे नेट लूज़र बनेंगे। खासकर जब आप एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के दौर में प्रवेश कर रहे हैं, तब अधिक कुशल प्रतिभाओं की आवश्यकता होगी।”

यह बात उन्होंने आव्रजन के व्यापक मुद्दों, विशेष रूप से एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम पर उठे सवाल के जवाब में कही।

बिना किसी देश का नाम लिए जयशंकर ने कहा कि भारत को यह संदेश देना होगा कि “सीमाओं के पार प्रतिभा का उपयोग हमारे साझा हित में है।”

उन्होंने कहा, “जो लोग उद्यमिता और तकनीक के अग्रणी क्षेत्र में हैं, वे स्वयं मोबिलिटी के पक्ष में दलील देंगे। लेकिन जिनके पास कोई राजनीतिक आधार या वोट बैंक है, वे इसका विरोध करते हैं — और अंततः किसी न किसी समझौते पर आ जाते हैं।”

जयशंकर ने प्रतिभा के गतिशीलता के विरोध को उन प्रयासों से भी जोड़ा जिसमें कुछ देश चीन से विनिर्माण इकाइयों को बाहर निकालना चाहते हैं।

एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियाँ विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को तीन साल के लिए नियुक्त करती हैं, जिसे आगे तीन साल और बढ़ाया जा सकता है।

अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के अनुसार, हाल के वर्षों में 71 प्रतिशत एच-1बी स्वीकृत आवेदन भारतीयों के रहे हैं।

उन्होंने कहा, “विकसित देशों में नौकरियों पर जो दबाव है, वह उन लोगों के आने की वजह से नहीं है। दबाव इसलिए बना क्योंकि उन्होंने विनिर्माण को बाहर जाने दिया — और आप जानते हैं वह कहां गया।”

उन्होंने यह भी कहा, “अगर लोगों के लिए यात्रा करना मुश्किल होगा, तो काम रुकने वाला नहीं है। लोग नहीं चलेंगे तो काम चलकर जाएगा।”

इसके अलावा जयशंकर ने कानूनी मोबिलिटी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा, “एक वैश्वीकृत दुनिया में जब हम आर्थिक संबंधों की बात करते हैं, तो अधिकांश बातें व्यापार पर केंद्रित होती हैं। इसमें गलत कुछ नहीं है, लेकिन हम काम और उससे जुड़ी आवाजाही को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

पिछले साल भारत को 135 अरब डॉलर की प्राप्तियाँ (रेमिटेंस) हुईं — जो अमेरिका को हमारे निर्यात के लगभग दोगुने के बराबर है।”

जयशंकर ने अवैध प्रवासन के खतरों के बारे में भी आगाह किया।

उन्होंने कहा, “तस्करी, इससे जुड़े अपराध, और इसके साथ राजनीतिक एवं अलगाववादी एजेंडा रखने वाले लोगों का जुड़ना — ये सभी अवैध प्रवासन के दुष्परिणाम हैं।”

विदेश मंत्री ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों की समस्याएँ सुलझाने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया, “पिछले तीन वर्षों में सिर्फ खाड़ी देशों में ही हमने ‘मदद पोर्टल’ के जरिए 1,38,000 शिकायतों का समाधान किया है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय कल्याण कोष (Indian Community Welfare Fund) के जरिए भी बड़ी संख्या में भारतीयों को सहायता दी गई।

जयशंकर ने बताया, “पिछले तीन वर्षों में 2,38,000 लोग इस कोष से लाभान्वित हुए हैं — जिनमें टिकट खरीदकर घर भेजना, कानूनी सहायता, या विदेश में मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार जैसी सहायता शामिल है।”

उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने विभिन्न देशों के साथ मोबिलिटी एग्रीमेंट किए हैं।

उन्होंने कहा, “आज मोबिलिटी से जुड़े अंतर-सरकारी समझौते हमारी कूटनीति का एक प्रमुख हिस्सा हैं। ऐसे 21 समझौते हमारे पास हैं, और कुछ एफटीए में भी मोबिलिटी प्रावधान शामिल हैं। यह कई संबंधों में नया आयाम जोड़ते हैं।”

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