जाति जनगणना विवाद: राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा — जवाब बहुजनों के साथ ‘खुला विश्वासघात’

**EDS: THIRD PARTY; SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: LoP in Lok Sabha Rahul Gandhi with party leaders in the House during the Winter Session, in New Delhi, Wednesday, Dec. 3, 2025. (Sansad TV via PTI Photo)(PTI12_03_2025_000278B)

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार की ओर से जाति जनगणना को लेकर दिया गया जवाब देश के बहुजनों के साथ खुली हुई धोखाधड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास न कोई ठोस ढांचा है, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा और न ही जनता के साथ संवाद।

यह बयान तब आया जब सरकार ने लोकसभा में गांधी के उस सवाल का जवाब दिया जिसमें उन्होंने अगली जनगणना और उसमें जातिगत गणना के बारे में जानकारी मांगी थी। राहुल गांधी ने एक्स पर हिन्दी में पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में सरकार से जाति जनगणना पर सवाल किया और जो जवाब मिला वह हैरान करने वाला है। उनके अनुसार सरकार न किसी ढांचे पर काम कर रही है, न कोई समय-सीमा दे रही है और न ही अन्य राज्यों में सफल हुए जाति सर्वेक्षणों से कोई सीखने की इच्छा दिखा रही है।

राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा में तीन सवाल रखे थे, जिनमें उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया, प्रश्नावली तैयार करने, समय-सीमा तय करने और इन प्रक्रियाों के मसौदे को जनता और जनप्रतिनिधियों के सुझाव के लिए साझा करने की संभावनाओं के बारे में पूछा था। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार अन्य राज्यों में किए गए जाति सर्वेक्षणों की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाने पर विचार कर रही है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में बताया कि जनगणना 2027 दो चरणों में की जाएगी। पहला चरण, यानी मकान सूचीकरण और आवास जनगणना, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की अवधि में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सुविधानुसार पूरा किया जाएगा। दूसरा चरण, यानी जनसंख्या गणना, फरवरी 2027 में होगी जिसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे होगी। हालांकि जम्मू-कश्मीर के बर्फ़ीले इलाकों, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड जैसे राज्यों में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में की जाएगी, जिसकी संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 होगी।

मंत्री ने बताया कि हर जनगणना से पहले प्रश्नावली विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और डेटा उपयोगकर्ताओं के सुझावों के आधार पर तैयार की जाती है। मसौदा प्रश्नावली को अंतिम रूप देने से पहले फील्ड में परीक्षण भी किया जाता है। नियमों के अनुसार प्रश्नावली को केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित करती है। उन्होंने कहा कि जनगणना की 150 साल से अधिक की परंपरा है, और हर बार पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए अगली जनगणना की तैयारी की जाती है। इसके साथ ही, संबंधित हितधारकों से भी सुझाव लिए जाते हैं।

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