आरएस अध्यक्ष: नियम 267 केवल दिन के एजेंडा में पहले से सूचीबद्ध विषयों पर ही लागू हो सकता है

**EDS: THIRD PARTY IMAGE, SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: Rajya Sabha Chairman CP Radhakrishnan arrives in the House during the Winter session of Parliament, in New Delhi, Thursday, Dec. 4, 2025. (Sansad TV via PTI Photo) (PTI12_04_2025_000037B)

नई दिल्ली, 4 दिसंबर (PTI) — राज्यसभा के अध्यक्ष सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा केवल उन विषयों पर हो सकती है जो पहले से दिन के एजेंडा में सूचीबद्ध हैं, और किसी अन्य अप्रासंगिक विषय पर नहीं।

हाल के वर्षों में विपक्षी सांसद नियम 267 के तहत नोटिस दे रहे हैं, ताकि दिन के एजेंडा को स्थगित करके वे अपने लिए महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर सकें। लेकिन पिछले दो दशकों में इनमें से कोई भी नोटिस स्वीकार नहीं किया गया। इस सत्र में भी सभी नोटिसों को नियम के अनुपालन न करने के कारण अस्वीकार कर दिया गया।

अध्यक्ष ने कहा कि नियम 267 का उपयोग अक्सर “लगभग दैनिक” किया जा रहा है, जबकि यह व्यक्तिगत सांसदों के विवेकानुसार उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की अनुमति देने के लिए नहीं बनाया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियम 267 को लोकसभा में अंतराल प्रस्ताव (Adjournment Motion) के बराबर नहीं माना जा सकता।

नियम के तहत केवल दिन के एजेंडे में सूचीबद्ध कार्य ही निलंबित किए जा सकते हैं, और कोई नोटिस तभी वैध होगा जब इसमें स्पष्ट रूप से वह नियम और प्रस्ताव शामिल हो। सूचीबद्ध कार्य के बाहर विषय पर चर्चा का नोटिस “अवैध” होगा।

राधाकृष्णन ने नियम 267 के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे 2000 में संशोधित किया गया था ताकि इसका दुरुपयोग रोककर केवल सूचीबद्ध विषयों तक ही इसका दायरा सीमित किया जा सके।

विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सांसद नियम 267 के तहत इसलिए नोटिस देते हैं क्योंकि उन्हें तात्कालिक या अल्पकालीन चर्चा का अवसर नहीं मिलता। वहीं, गृह राज्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि सरकार किसी चर्चा से बच नहीं रही है और विपक्ष के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

Category: ब्रेकिंग न्यूज

SEO Tags: #स्वदेशी, #बातम्या, नियम 267 के तहत चर्चा केवल दिन के एजेंडा में पहले से सूचीबद्ध विषयों पर ही: राज्यसभा अध्यक्ष