
न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन, 11 दिसंबर (PTI) — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह “शर्म की बात” है कि भारत और चीन जैसे देशों के छात्र शीर्ष अमेरिकी विश्वविद्यालयों से स्नातक होने के बाद अपने देश लौटने के लिए मजबूर होते हैं। उन्होंने कहा कि ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ कंपनियों को ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों को अमेरिका में काम पर रखने और रोकने में मदद करेगा।
बुधवार को ट्रम्प ने एक मिलियन डॉलर के ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ की शुरुआत की, जो अमेरिका की नागरिकता के लिए आप्रवासियों को मार्ग प्रदान करने वाला वीज़ा कार्यक्रम है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड उन लोगों की योग्यता पर आधारित है, जो अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान कर सकते हैं।
व्हाइट हाउस में एक राउंडटेबल के दौरान ट्रम्प ने कहा, “यह एक उपहार है कि हमारे देश में महान लोग आएं। ये छात्र कॉलेज से स्नातक होते हैं, और उन्हें भारत, चीन या फ्रांस लौटना पड़ता है। इसे रोक पाना बहुत मुश्किल है। यह शर्म की बात है। यह एक हास्यास्पद स्थिति है। हम इसे ठीक कर रहे हैं।”
आईबीएम के भारतीय अमेरिकी सीईओ अरविंद कृष्णा और डेल टेक्नोलॉजीज के सीईओ माइकल डेल के साथ ट्रम्प ने गोल्ड कार्ड वेबसाइट लॉन्च की और बताया कि कंपनियां इसे “खरीद” सकती हैं ताकि वे शीर्ष अमेरिकी विश्वविद्यालयों जैसे व्हार्टन, हार्वर्ड और एमआईटी से भर्ती किए गए छात्रों को अमेरिका में रख सकें।
ट्रम्प ने कहा कि एप्पल के सीईओ टिम कुक और अन्य अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वे बेहतरीन कॉलेजों के छात्रों को नहीं रख सकते क्योंकि यह सुनिश्चित नहीं होता कि वे देश में रह पाएंगे। ट्रम्प ने इसे “छात्रों को देश से बाहर फेंक दिया जाना” बताया।
गोल्ड कार्ड का उद्देश्य कंपनियों को छात्रों को स्थायी रूप से अमेरिका में रखने का रास्ता देना है। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने बताया कि व्यक्तिगत के लिए इसकी लागत एक मिलियन डॉलर और कंपनी के लिए दो मिलियन डॉलर होगी। इसमें “पूर्ण और सर्वोत्तम” जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल योग्य लोग ही अमेरिका में आ सकें।
ट्रम्प गोल्ड कार्ड पहले से अनुमोदित वीज़ा का हिस्सा है और यह सुनिश्चित करेगा कि केवल “महान लोग” ही अमेरिका में आएं। वेबसाइट trumpcard.gov पर आवेदन करने का लिंक उपलब्ध है और यह “रिकॉर्ड समय में अमेरिकी निवास” का वादा करती है।
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