
नई दिल्ली, 11 दिसंबर (PTI) — वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद के दोनों सदनों में हुई बहस के बाद, कांग्रेस ने गुरुवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और “उनकी पूरी ब्रिगेड” अपने “झूठ के लिए पूरी तरह उजागर और शर्मिंदा” हो गए हैं।
कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में वंदे मातरम् पर तीन दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि कई भाषणों में राष्ट्रीय गान का भी उल्लेख हुआ।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा,
“यह साफ है कि प्रधानमंत्री और उनकी टीम ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान पर लिखी दो प्रामाणिक किताबें कभी पढ़ी ही नहीं — जिन्हें देश के बेहतरीन इतिहासकारों ने लिखा है।”
उन्होंने रुद्रांग्शु मुखर्जी की ‘Song of India: A Study of the National Anthem’ और सब्यसाची भट्टाचार्य की ‘Vande Mataram’ की कवर फोटो भी साझा की।
उन्होंने कहा, “यह उम्मीद करना भी ज्यादा है कि वे अपनी झूठी बातों के उजागर होने के बाद भी इन्हें पढ़ेंगे।”
इससे पहले रमेश ने इतिहासकार सुगत बोस के उस बयान का जिक्र किया था जिसमें उन्होंने बताया कि 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर कांग्रेस ने तय किया था कि राष्ट्रीय बैठकों में वंदे मातरम् का सिर्फ पहला हिस्सा ही गाया जाएगा। रमेश ने कहा कि यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के दावों को और “झूठा साबित” करती है।
सोमवार को लोकसभा ने 150 वर्षों पर बहस की, जबकि राज्यसभा ने मंगलवार और बुधवार को इस पर चर्चा की।
बुधवार को विपक्ष ने भाजपा नेताओं पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया।
रमेश ने कहा कि इस बहस का असली उद्देश्य “जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना और स्वतंत्रता सेनानियों, जिनमें रवींद्रनाथ टैगोर भी शामिल हैं, का अपमान करना था।”
सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि नेहरू ने मोहम्मद अली जिन्ना के विरोध के आगे झुककर “वंदे मातरम् से गद्दारी” की, जिसके कारण इसे तोड़ा गया और इससे appeasement politics की शुरुआत हुई।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई चर्चा के दौरान, दोनों सदनों में राष्ट्रवाद सहित कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
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