
नई दिल्ली, 12 दिसंबर (PTI) केंद्र ने गुरुवार को संसद को सूचित किया कि उसने फर्जी भर्ती नौकरी ऑफर्स में शामिल संदिग्ध फर्मों के मामलों पर संज्ञान लिया है, जिन्होंने भारतीय नागरिकों को मुख्यतः सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में लुभाया, और अब तक कंबोडिया, म्यांमार और लाओ PDR से 6,700 से अधिक भारतीयों को बचाया जा चुका है।
विदेश राज्य मंत्री किरीटि वर्धन सिंह ने यह जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
उन्होंने कहा, “सरकार के ध्यान में ऐसे मामलों का आना हुआ है जहाँ संदिग्ध फर्म फर्जी भर्ती नौकरी ऑफर्स में शामिल थीं, जिन्होंने भारतीय नागरिकों को मुख्यतः सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से कंबोडिया, म्यांमार, लाओ PDR सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में लुभाया, और उन्हें इन देशों में संचालित स्कैम सेंटरों से साइबर अपराध और अन्य धोखाधड़ी गतिविधियाँ करवाने पर मजबूर किया।”
मंत्री ने कहा कि इन देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सटीक संख्या ज्ञात नहीं है क्योंकि भारतीय नागरिक इन स्कैम सेंटरों तक अपनी इच्छा से पहुँचते हैं, जो धोखाधड़ी या बेईमान भर्ती एजेंटों या एजेंसियों और अवैध चैनलों के माध्यम से ऐसा करते हैं।
केंद्र ने कहा कि भारत सरकार ने इस मुद्दे को समय-समय पर मेजबान सरकारों के साथ राजनीतिक स्तर पर उठाया है।
उन्होंने कहा, “मिशन/पोस्ट स्थानीय विदेश मंत्रालय और मेजबान देश की अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों जैसे इमिग्रेशन, श्रम विभाग, गृह मामलों, रक्षा और सीमा मामलों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भारतीय नागरिकों के बचाव और प्रत्यावर्तन के मुद्दे को सक्रियता से उठाते हैं।”
अपने उत्तर में सिंह ने यह भी साझा किया कि अब तक कंबोडिया, लाओ PDR और म्यांमार में भारतीय दूतावासों के संगठित प्रयासों से सॉफ्टवेयर इंजीनियरों सहित कितने भारतीय नागरिकों को बचाया गया है।
ये आंकड़े कंबोडिया में 2,265, लाओ PDR में 2,290 और म्यांमार में 2,165 रहे।
हालांकि, साझा किए गए डेटा में यह निर्दिष्ट नहीं किया गया कि इन भारतीय नागरिकों को किस अवधि में बचाया गया।
सिंह ने कहा कि सरकार ने विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों को आवश्यकता पड़ने पर संबंधित मिशन या पोस्ट तक पहुँचने में सक्षम बनाने के लिए विभिन्न चैनल स्थापित किए हैं।
उन्होंने कहा, “वे मिशन/पोस्ट से वॉक-इन इंटरव्यू, ईमेल, बहुभाषी 24×7 आपातकालीन नंबर, व्हाट्सएप नंबर, शिकायत निवारण पोर्टल जैसे MADAD, CPGRAMS और eMigrate, तथा सोशल मीडिया आदि के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।”
सिंह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक रूप से निपटने के लिए ‘इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C)’ एक संलग्न कार्यालय के रूप में स्थापित किया है।
मंत्रालय समय-समय पर फर्जी नौकरी रैकेट के बारे में परामर्श और सोशल मीडिया पोस्ट जारी करता है।
इसी तरह के संचार संबंधित भारतीय मिशनों या विदेश स्थित पोस्टों द्वारा भी उनकी आधिकारिक वेबसाइटों, सोशल मीडिया हैंडल और प्रिंट मीडिया के माध्यम से जारी किए जाते हैं।
उन्होंने कहा, “दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में हमारे मिशनों ने ऐसे मामलों की जानकारी मिलने पर कि भारतीय नागरिकों को दक्षिण-पूर्व देशों में फर्जी नौकरी रैकेटों द्वारा लुभाया जा रहा है, नौकरी चाहने वालों के लिए कई विस्तृत सलाह जारी की हैं, और उन्हें सलाह दी है कि किसी भी रोजगार प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले भर्ती एजेंटों और कंपनियों के सभी पूर्ववृत्तों की जाँच करें और इन देशों में धोखाधड़ी वाले नौकरी प्रस्तावों के लालच में न फँसें और न ही फँसाए जाएँ।” PTI KND NB NB
