मुंबई, 12 दिसम्बर (PTI) — कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा स्पीकर शिवराज पाटिल ने अपने कई दशकों लंबे राजनीतिक करियर में अनेक भूमिकाएँ निभाईं और महाराष्ट्र तथा राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख व्यक्तित्व रहे। हालांकि, उन्हें 26/11 मुंबई हमलों के बाद केंद्रीय गृह मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।
90 वर्षीय पाटिल का शुक्रवार को महाराष्ट्र के लातूर जिले में अपने आवास पर संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। अपने अंतिम दिनों तक पाटिल कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार के कट्टर समर्थक रहे और उन्होंने सार्वजनिक जीवन में पांच दशकों से अधिक समय तक कई संवैधानिक और मंत्रीस्तरीय पद संभाले।
केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में 2008 में पाटिल को जनता और मीडिया की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, जब उन्हें 26 नवंबर की रात तीन अलग-अलग कपड़ों में देखा गया, जबकि मुंबई में दस पाकिस्तान प्रशिक्षित भारी सशस्त्र आतंकवादियों द्वारा अभूतपूर्व हमले किए जा रहे थे। आलोचना के जवाब में पाटिल ने कहा था कि लोगों को नीतियों की आलोचना करनी चाहिए, न कि कपड़ों की। मुंबई हमलों की विशालता ने पाटिल के राजनीतिक करियर पर भारी प्रभाव डाला और उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी स्थिति लगभग असंभव बना दी, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने 30 नवंबर 2008 को इस्तीफा दे दिया।
1991 से 1996 तक लोकसभा स्पीकर के रूप में उन्होंने कई संसदीय पहलें शुरू कीं और सदन में अनुशासन और शिष्टाचार पर हमेशा जोर दिया। उन्हें एक गरिमापूर्ण और निष्पक्ष अध्यक्ष के रूप में वर्णित किया गया और संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ तथा संवैधानिक मामलों की असाधारण पकड़ के लिए व्यापक रूप से सम्मानित किया गया।
लातूर से सात बार लोकसभा सांसद रहे पाटिल को 2004 में रूपा निलंगेकर, कांग्रेस के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर की बहू, के हाथों हार का सामना करना पड़ा, जिन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का उन पर इतना भरोसा था कि लातूर से हारने के बावजूद पाटिल को राज्यसभा सदस्य बनाया गया और 2004 में पार्टी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार बनने पर उन्हें महत्वपूर्ण गृह मंत्रालय का कार्यभार दिया गया।
पाटिल 2010-2015 तक पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक भी रहे। उन्हें राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया और 2014 में भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार आने के बाद उन्होंने अपनी राज्यपाल पदावधि के अंत तक कार्य किया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के रूप में पाटिल यह दुर्लभ उपलब्धि रखते थे कि उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा और लोकसभा दोनों के स्पीकर के रूप में सेवा दी। महाराष्ट्र के दो और दिग्गज नेताओं — जी. वी. मावलंकर और मनोहर जोशी — ने लोकसभा स्पीकर के रूप में सेवा दी। मावलंकर लोकसभा के पहले स्पीकर थे, जबकि जोशी 1995-1999 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे और बाद में लोकसभा के अध्यक्ष पद पर गए।
लातूर जिले में जन्मे पाटिल का राजनीतिक सफर 1960 के दशक के अंत में लातूर नगरपालिका के अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ। वे दो बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए और सांसद के रूप में कई कार्यकाल निभाए। 2015 के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से लगभग दूरी बना ली और अपना समय दिल्ली और लातूर में बिताया।
अक्टूबर 2022 में दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन के दौरान पाटिल ने यह कहते हुए विवाद खड़ा किया कि ‘जिहाद’ की अवधारणा केवल इस्लाम में ही नहीं, बल्कि भगवद गीता और ईसाई धर्म में भी मौजूद है।
इस वर्ष की शुरुआत में पाटिल और उनके परिवार के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में भेंट भी की।
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