नई दिल्ली, 15 दिसंबर (पीटीआई) — भारत ने मेक्सिको द्वारा लगाए गए ऊँचे आयात शुल्क से घरेलू निर्यातकों को राहत दिलाने के उद्देश्य से मेक्सिको के साथ तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) करने का प्रस्ताव रखा है। यह जानकारी एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को दी।
मेक्सिको ने उन देशों से आने वाले उत्पादों पर, जिनके साथ उसका मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नहीं है, लगभग 5 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक के ऊँचे आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है। यह शुल्क करीब 1,463 टैरिफ लाइनों पर लागू होगा। भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देश इस श्रेणी में आते हैं।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस मुद्दे पर भारत ने मेक्सिको के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा, “तकनीकी स्तर पर बातचीत चल रही है। आगे बढ़ने का सबसे तेज़ रास्ता तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) है, क्योंकि मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने में काफी समय लगता है। इसलिए हम यह देख रहे हैं कि सबसे बेहतर रास्ता क्या हो सकता है।”
एफटीए में आम तौर पर दोनों व्यापारिक साझेदार अधिकतर वस्तुओं पर आयात शुल्क को काफी हद तक कम या समाप्त कर देते हैं, जबकि पीटीए में सीमित संख्या में उत्पादों पर ही शुल्क में कटौती या छूट दी जाती है।
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मेक्सिको के इस फैसले के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में शिकायत नहीं की जा सकती, क्योंकि ये शुल्क डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप हैं और तय सीमा के भीतर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मेक्सिको का प्राथमिक लक्ष्य भारत नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमने पीटीए का प्रस्ताव इसलिए दिया है क्योंकि यह डब्ल्यूटीओ के अनुरूप समाधान है। इसके जरिए हम भारतीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए आवश्यक रियायतें हासिल कर सकते हैं और बदले में उन क्षेत्रों में मेक्सिको को छूट दे सकते हैं, जहां उनकी भारत में निर्यात रुचि है।”
स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और व्यापार असंतुलन को सुधारने के उद्देश्य से मेक्सिको ने डब्ल्यूटीओ ढांचे के तहत 1 जनवरी 2026 से गैर-एफटीए साझेदार देशों पर एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) आयात शुल्क (5–50 प्रतिशत) बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह निर्णय 1,455 उत्पाद श्रेणियों पर लागू होगा।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इससे भारत के लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर असर पड़ेगा। खास तौर पर ऑटोमोबाइल, दोपहिया वाहन, ऑटो पार्ट्स, वस्त्र, लोहा-इस्पात, प्लास्टिक, चमड़ा और फुटवियर जैसे क्षेत्र प्रभावित होंगे। यह कदम चीनी आयात पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से भी उठाया गया है।
भारत-मेक्सिको के बीच 2024 में कुल वस्तु व्यापार 8.74 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 5.73 अरब डॉलर, आयात 3.01 अरब डॉलर और व्यापार अधिशेष 2.72 अरब डॉलर था।
सरकार इस टैरिफ संशोधन के सामने आने के बाद से लगातार इसकी व्यापक समीक्षा कर रही है, हितधारकों से संवाद कर रही है और भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए रचनात्मक बातचीत में जुटी है, ताकि दोनों देशों के व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए स्थिर व्यापार माहौल सुनिश्चित किया जा सके।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि मेक्सिको का यह फैसला विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और प्लास्टिक क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, “इतने ऊँचे शुल्क हमारी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कमजोर करेंगे और उन आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकते हैं, जिन्हें विकसित होने में वर्षों लगे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि यह घटनाक्रम भारत और मेक्सिको के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत को रेखांकित करता है।
उद्योग संगठन एसीएमए (ACMA) के अनुसार, मेक्सिको द्वारा भारतीय आयात पर शुल्क बढ़ाए जाने से घरेलू ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं पर लागत का दबाव और बढ़ेगा।
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