पीएम डिग्री विवाद: अहमदाबाद सेशंस कोर्ट ने केजरीवाल, संजय सिंह की अलग-अलग ट्रायल की याचिका खारिज की

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Dec. 12, 2025, Aam Aadmi Party National Convener Arvind Kejriwal addresses a public meeting, at Velim village, in Goa. (@ArvindKejriwal/X via PTI Photo)(PTI12_12_2025_000310B)

अहमदाबाद, 16 दिसंबर (पीटीआई) — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में अहमदाबाद की एक सेशंस अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह की अलग-अलग ट्रायल की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि दोनों नेता “एक समान उद्देश्य से प्रेरित” प्रतीत होते हैं।

अतिरिक्त सेशंस न्यायाधीश एम पी पुरोहित ने सोमवार को पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अलग-अलग सुनवाई की उनकी मांग को ठुकरा दिया गया था, साथ ही आदेशों को रद्द करने का अनुरोध भी किया गया था।

गुजरात विश्वविद्यालय ने यह मानहानि मामला दोनों AAP नेताओं के खिलाफ दायर किया था। विश्वविद्यालय का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री को लेकर विश्वविद्यालय के संदर्भ में की गई उनकी टिप्पणियां “व्यंग्यात्मक और अपमानजनक” थीं।

याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों ने 1 और 2 अप्रैल 2023 को एक ही राजनीतिक दल के सदस्य होने के नाते बयान दिए और वे “एक ही लेन-देन का हिस्सा” प्रतीत होते हैं, जिनकी गतिविधियों में निरंतरता थी और जो “एक समान उद्देश्य से प्रेरित” थीं।

दोनों नेताओं ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अलग-अलग हैं और कथित घटनाओं की तारीखें भी भिन्न हैं, इसलिए उन्हें एक साथ ट्रायल का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज करना अवैध है और उस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने कहा कि गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल द्वारा दायर शिकायत के आधार पर प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि) के तहत मामला बनता है।

केजरीवाल और संजय सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अप्रैल 2023 में गुजरात हाई कोर्ट द्वारा मुख्य सूचना आयुक्त के उस आदेश को रद्द किए जाने के बाद टिप्पणियां की थीं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था।

कथित मानहानिकारक बयान प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जिनमें X (पूर्व में ट्विटर) शामिल है, के माध्यम से गुजरात विश्वविद्यालय को निशाना बनाकर दिए गए थे।

शिकायतकर्ता ने कहा कि इन टिप्पणियों से गुजरात विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, जिसने जनता के बीच अपनी एक सशक्त छवि स्थापित की है।

उसने आरोप लगाया कि ये बयान व्यंग्यात्मक थे और जानबूझकर विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दिए गए थे, जिन्हें मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित किया गया। पीटीआई KA PD NSK GK

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