
नई दिल्ली, 16 दिसंबर (पीटीआई) — लोकसभा ने मंगलवार को उच्च शिक्षण संस्थानों के नियमन के लिए 13 सदस्यीय निकाय की स्थापना से जुड़े विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का प्रस्ताव पारित किया।
यह प्रस्ताव केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रखा, जिसे सदन ने ध्वनि मत से मंजूरी दी।
सोमवार को विधेयक पेश करते समय सरकार ने कहा था कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा जाना चाहिए।
मंगलवार को पारित प्रस्ताव के अनुसार, संयुक्त समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। प्रस्तावित समिति बजट सत्र 2026 के पहले चरण के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
आमतौर पर बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को राष्ट्रपति के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अभिभाषण से होती है। इसका पहला चरण सामान्यतः 10 फरवरी के आसपास एक महीने के अवकाश के लिए स्थगित होता है।
विधेयक के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्तमान में जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कई नियामकों की मौजूदगी और असंगत नियामक स्वीकृति प्रक्रियाएं, उन्हें समाप्त किया जाएगा।
उच्च शिक्षा आयोग का नेतृत्व भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष करेंगे। यह आयोग सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों, शिक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक दायरे में आने वाले राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों — जिनमें आईआईटी, एनआईटी, आईआईएससी, आईआईएसईआर, आईआईएम और आईआईआईटी शामिल हैं — को अपने अंतर्गत लाएगा।
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