
अम्मान, 16 दिसंबर (पीटीआई) — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत और जॉर्डन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना कर 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने जॉर्डन की कंपनियों से भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का लाभ उठाने और आकर्षक रिटर्न हासिल करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा पर जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे। जॉर्डन, प्रधानमंत्री की चार दिवसीय तीन देशों की यात्रा का पहला चरण है, जिसके तहत वह इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे।
मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी और राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने यहां भारत–जॉर्डन बिजनेस फोरम को संबोधित किया। इस अवसर पर क्राउन प्रिंस हुसैन, जॉर्डन के व्यापार एवं उद्योग मंत्री और निवेश मंत्री भी उपस्थित रहे।
दोनों नेताओं ने भारत और जॉर्डन के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और दोनों देशों के उद्योग जगत के नेताओं से उपलब्ध संभावनाओं और अवसरों को विकास एवं समृद्धि में बदलने का आह्वान किया।
राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने कहा कि जॉर्डन के मुक्त व्यापार समझौते और भारत की आर्थिक शक्ति को मिलाकर दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया तथा उससे आगे तक एक आर्थिक गलियारा बनाया जा सकता है।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की सफलता, जो जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, जॉर्डन और दुनिया भर के साझेदारों के लिए अपार व्यावसायिक अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने कहा, “भारत और जॉर्डन के बीच संबंध ऐतिहासिक विश्वास और भविष्य के आर्थिक अवसरों का संगम हैं।”
प्रधानमंत्री ने जॉर्डन की कंपनियों को भारत के साथ साझेदारी करने और इसके 1.4 अरब उपभोक्ता बाजार, मजबूत विनिर्माण आधार तथा स्थिर, पारदर्शी और पूर्वानुमेय नीतिगत वातावरण का लाभ उठाने का आमंत्रण दिया।
भारतीय अर्थव्यवस्था की 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की उच्च जीडीपी दरें उत्पादकता-आधारित शासन और नवाचार-प्रेरित विकास नीतियों का परिणाम हैं।
यह उल्लेख करते हुए कि भारत जॉर्डन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यापार की दुनिया में आंकड़ों का महत्व होता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल आंकड़ों पर ध्यान देने नहीं, बल्कि ऐसे दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी संबंध बनाने आए हैं जो सांख्यिकी से आगे जाते हों।
मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन के बीच मजबूत सभ्यतागत संबंधों पर आधारित एक जीवंत समकालीन साझेदारी है।
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्षों में 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, फिनटेक, हेल्थ-टेक और एग्री-टेक जैसे क्षेत्रों में भारत–जॉर्डन व्यापार सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया और दोनों देशों के स्टार्टअप्स से इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने का आह्वान किया।
फार्मा और मेडिकल डिवाइसेज क्षेत्र में भारत की ताकत और जॉर्डन की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं को पूरक बनाकर पश्चिम एशिया और अफ्रीका के लिए जॉर्डन को एक भरोसेमंद हब बना सकते हैं।
उन्होंने कृषि, कोल्ड चेन, फूड पार्क, उर्वरक, बुनियादी ढांचा, ऑटोमोबाइल, ग्रीन मोबिलिटी और विरासत व सांस्कृतिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया।
भारत की हरित पहलों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने अक्षय ऊर्जा, ग्रीन फाइनेंसिंग, डिसेलिनेशन और जल पुनर्चक्रण के क्षेत्रों में भारत–जॉर्डन सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया।
फोरम में बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, फार्मा, उर्वरक, कृषि, अक्षय ऊर्जा, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, रक्षा और विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़े दोनों देशों के उद्योग जगत के नेता शामिल हुए।
प्रतिनिधिमंडल में फिक्की और जॉर्डन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जिनके बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) मौजूद है।
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