
नई दिल्ली, 16 दिसंबर (पीटीआई) — कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार के ग्रामीण रोजगार विधेयक VB–G RAM G के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी का आरोप है कि यह विधेयक मनरेगा (MGNREGA) की जगह लाने की कोशिश है और यह एक “बीजेपी–आरएसएस साजिश” है, जिसका उद्देश्य अधिकार-आधारित कल्याणकारी योजना को खत्म करना तथा महात्मा गांधी की विरासत, श्रमिकों के अधिकारों और संघीय जिम्मेदारी पर हमला करना है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने सभी राज्य कांग्रेस अध्यक्षों को पत्र लिखकर जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का आग्रह किया है।
पत्र में उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन महात्मा गांधी के चित्रों के साथ आयोजित किए जाएं, जो उनके नाम और मूल्यों को मिटाने के प्रयास के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक होंगे। साथ ही, यह भी उजागर किया जाए कि प्रस्तावित कानून मनरेगा के करोड़ों लाभार्थियों को कैसे प्रभावित करेगा।
वेणुगोपाल ने कहा, “गांधीजी की विरासत, श्रमिकों के अधिकारों और संघीय जिम्मेदारी पर यह संयुक्त हमला एक बड़ी बीजेपी–आरएसएस साजिश को उजागर करता है, जिसका मकसद अधिकार-आधारित कल्याण को खत्म कर उसे केंद्र-नियंत्रित दान व्यवस्था से बदलना है।”
विपक्ष ने लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] विधेयक, 2025 पेश किए जाने का कड़ा विरोध किया।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में भी केंद्र के इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन किया।
राज्य कांग्रेस अध्यक्षों को लिखे पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि 28 दिसंबर को पार्टी के स्थापना दिवस पर सभी ब्लॉक और गांवों में महात्मा गांधी के चित्रों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिनमें श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और काम के अधिकार के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई जाए।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “यह एक राजनीतिक और नैतिक संघर्ष है। कांग्रेस को मनरेगा, गांधीजी की विरासत और सबसे गरीबों के लिए न्याय के संवैधानिक वादे की रक्षा के लिए आगे आकर नेतृत्व करना होगा।”
पत्र में उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त करने के लिए विधेयक लाकर एक चिंताजनक और जानबूझकर उठाया गया कदम उठाया है।
उन्होंने लिखा, “यह कोई सामान्य विधायी प्रक्रिया नहीं है। यह एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है, जिसका उद्देश्य एक ऐतिहासिक, अधिकार-आधारित जन-कानून को कमजोर करना और भारत के सबसे पहचान योग्य कल्याणकारी कानून से महात्मा गांधी का नाम और मूल्य मिटाना है।”
उन्होंने दोहराया कि “गांधीजी की विरासत, अधिकारों और संघीय जिम्मेदारी पर यह संयुक्त हमला एक बड़ी बीजेपी–आरएसएस साजिश को उजागर करता है, जिसका मकसद अधिकार-आधारित कल्याण को समाप्त कर उसे केंद्र-नियंत्रित दान व्यवस्था से बदलना है।”
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